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वीएएस की गुहार, इन खातों के कारण हम हो रहे ब्लेकमेलिंग के शिकार, क्या है मामला पढि़ए खबर…

-संचालक ने शासन से मांगा मार्गदर्शन, खाता बंद करो या परमिशन दो - वीएएस कम निजी खातों में कैश हो रहा है योजना का लाखों रुपए
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वीएएस की गुहार, इन खातों के कारण हम हो रहे ब्लेकमेलिंग के शिकार, क्या है मामला पढि़ए खबर...

रायगढ़. पत्रिका की ओर से उठाए गए वीएएस खातों के मामले में विभागीय हलचल शुरू हो गई है। बकायदा वेटनरी विभाग के उपसंचालक आरएच पांडेय ने इस मामले में पत्रिका की खबर का हवाला देते हुए शासन से मार्गदर्शन मांगा है। जिसमें कहा गया है कि इन खातों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं इसलिए क्या इन खातों को बंद कर दिया जाए अन्यथा इन खातों को संचालित करने का विधिवत अनुमति प्रदान किया जाए।

दूसरी ओर वेटनरी विभाग के वेटनरी अस्टिेंट सर्जन यानि कि वीएएस में भी खुशी की स्थिति देखी जा रही है। इन अधिकारियों का कहना है कि इन खातों के कारण लगातार हम ब्लेकमेलिंग के शिकार हो रहे हैं। दूसरी ओर विभाग भी इस मामले में सख्त नजर आ रहा है सूत्रों से जानकारी सामने आ रही है उसके अनुसार ब्लेकमेलिंग वाले मामले में लिगल एक्शन की तैयारी की जा रही है। इसमें फर्जी शिकायत को आधार बनाया जा रहा हैए कहा जा रहा है कि शासन की ओर से भी इस बात के निर्देश हैं कि यदि कोई फर्जी शिकायत करता है तो शिकायतकर्ता के खिलाफ एक्शन लिया जाए।

क्या है वीएएस खाता
पशुपालन विभाग में किसी भी वेटनरी अस्टिेंट का सरकारी खाता नहीं है यानि कि इस पद का कोई अधिकृत खाता बैंक में नहीं खुला है। जबकि योजनाओं का पैसा या तो ड्राफ्ट के माध्यम से या फिर चेक के माध्यम से इन अधिकारियों के पद के नाम से इनके पास आता है। परेशानी यह होती है कि इस पैसे को वो कहां कैश करवाएं, ऐसे में वो तकनीकी तौर पर से अपने निजी खातों में कैश करवा रहे हैं। जिसका नाम तो वेटनरी अस्स्टिेंट खाता का मिला है पर तकनीकी तौर पर वह मान्य नहीं है वो निजी खाता ही है।

क्योंकि इस प्रकार के खाते बिना वित्तमंत्रालय की अनुमति व डीडीओ कोड के नहीं खुल सकता है, इसके अलावा उस पद का टेन नंबर और केवाईसी भी इसमें चाहिए होती है। जो जानकारी सामने आ रही है उसमें कसी भी वेटनरी असिस्टेंट को डीडीओ कोड नहीं मिला है क्योंकि उन्हें आहरण वितरण का अधिकार यानि कि जिसे ड्राइंग डिस्परसमेंट कहते हैं वो नहीं हैं।

नौ खातों का हो रहा है संचालन
मिली जानकारी के अनुसार रायगढ़ जिले ऐसे नौ खातों का संचालन किया जा रहा है जहां सामान्य रूप से साल में औसतन दो से ढाई लाख रुपए प्रति वेटनरी असिस्टेंट फंड जारी होता है। हलांकि इस पूरी प्रक्रिया को विभागीय सहमति और कार्य सुविधा के नाम पर चलाया जा रहा है। परेशानी की बात यह है कि इन नौ खातों में आठ खाते सेविंग एकाउंट के हैं जबकि एक बरमकेला का खाता करंट एकाउंट है इन हालात में जो सेविंग एकाउंट है उसमें बकायदा ब्याज भी आ जा रहा है।

-हमने इस मामले में शासन से मार्गदर्शन मांगा है। आपने जो मुद्दा उठाया है उसे आधार बनाया गया है। जैसा मार्गदर्शन आता है उस प्रकार की कार्रवाई की जाएगी- आरएच पांडेयए उप संचालक, वेटनरी