
चूड़ामणि साहू रायगढ़. तमनार ब्लॉक के सराईटोला और मुड़ागांव में एक बार फिर फ्लोराइड का कहर लौटने लगा है। इन गांवों में लगे हैंडपंप व अन्य जलस्रोत से निकल रहे पानी से फ्लोराइड मिश्रित पानी आ रहा है। (Raigarh hindi news ) जिससे बच्चों के दांत काले होने लगे हैं। तमनार अंचल कोयलांचल के रूप में जाना जाता है। यहां के अधिकांश हिस्सों में कोयला है। वहीं इसमें कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां के जल स्रोत में फ्लोराइड की मात्रा अधिक रहती है। इसी तरह का गांव सराईटोला और मुड़ागांव भी है।
अज्ञानता वश यहां के लोग फ्लोराइड मिश्रित पानी का सेवन करते थे। ऐसे में यहां रहने वाले लोगों के दांत व हड्डियों में इसका विपरीत असर देखा जा रहा था। इसकी जानकारी होने पर स्वास्थ्य व पीएचई विभाग ने जांच की तो यह स्पष्ट हुआ कि वहां निकलने वाले जलस्रोत में फ्लोराइड की मात्रा है। इसको दूर करने के लिए उक्त दोनों गांवों में फ्लोराइड रिमूअल प्लांट लगाया गया। इससे काफी हद तक समस्या दूर हुई, लेकिन रखरखाव के अभाव में फ्लोराइड रिमूअल प्लांट अब खराब हो चुके हैं। ऐसे में अब फिर से फ्लोराइड का कहर गांव के लोगों को झेलना पड़ रहा है।
सराईटोला और मुड़ागांव में विभाग के द्वारा फ्लोराइड रिमूअल प्लांट लगाया गया था। वर्ष 2019 में इसकी रिपेयरिंग भी कराई गई थी। अब फिर से पानी में फ्लोराइड जाने की शिकायत नहीं आई है। यदि ऐसी स्थिति है तो इसे संज्ञान में लेकर जांच कराई जाएगी।
डी.पी. वर्मा, एसडीओ, पीएचई
सबसे पहले होते हैं दांत खराब
चिकित्सकों की मानें तो फ्लोराइड की वजह से सबसे पहले दांत काले होने लगते हैं। शुरुआत में काले होते हैं और समय से पहले ही टूट जाते हैं। फ्लोराइड के असर से टूटे दांत दोबारा आने की संभावना काफी कम होती है। दांत के अलावा शरीर के अन्य हड्डियों में भी इसका विपरीत असर पड़ता है।
क्या कहते हैं ग्रामीण : इस गांव में रहने वाले ग्रामीण अमृत भगत ने बताया कि कुछ वर्ष पहले प्रशासन की ओर से पानी को फिल्टर करने के लिए प्लांट लगाया गया था। यह कुछ साल तक तो चला, लेकिन फिर खराब हो गया है। एक दो बार मरम्मत भी हुई, लेकिन फिर स्थिति जस की तस हो गई। ऐसे में अब फिर से बच्चों के दांत काले हो रहे हैं।
फ्लोराइड लौटने का यह भी कारण
यहां के ग्रामीणों की मानें तो जांच के दौरान यह बात सामने आई कि थी कि करीब 250 फीट तक के पानी में फ्लोराइड की मात्रा नहीं थी। इसके नीचे यह मात्रा पाई जाती है। इससे जो बोर खनन किए गए थे। वह निर्धारित मात्रा में थी, लेकिन इसे बढ़ाए जाने की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि वहां एक कोल माइंस स्थापित हुई है। कोल खनन की वजह की पानी का स्रोत कोल खनन वाले स्थानों की ओर चला गया। इससे गांव का वॉटर लेवल डाउन हो गया। पानी के सोर्स तक पहुंचने के लिए बोर की गहराई बढ़ाई गई। इसकी वजह से फिर पानी में फ्लोराइड पाया जा रहा है।
Published on:
13 Nov 2022 10:47 am

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