
CG High Court: बेडरूम CCTV फुटेज पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, फैमिली कोर्ट को नए सिरे से सुनवाई के निर्देश(photo-patrika)
CG High Court: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से पति-पत्नी विवाद का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पति ने तलाक के लिए पत्नी के बेडरूम का CCTV फुटेज हाईकोर्ट में सबूत के तौर पर पेश किया है। मामला पहले फैमिली कोर्ट में था, लेकिन अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोबारा सुनवाई होगी।
महासमुंद निवासी महिला की शादी वर्ष 2012 में रायगढ़ के टिकेश्वर पंडा से हुई थी। पति जिंदल पावर, तमनार में कार्यरत था, इसलिए शादी के बाद महिला तमनार में रहने लगी। पत्नी का आरोप है कि वहां आने के बाद पति ने अतिरिक्त पैसों की मांग शुरू की और मानसिक-शारीरिक उत्पीड़न किया। इतना ही नहीं, पति ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए चुपचाप बेडरूम में CCTV कैमरा लगवा दिया।
महिला के अनुसार विरोध करने पर पति ने मारपीट की, घर से निकालने की धमकी दी और साथ रखने से इनकार कर दिया। नवंबर 2019 में समझौते की कोशिश नाकाम रहने के बाद पत्नी ने तमनार थाने में शिकायत दर्ज कराई।
वहीं पति का दावा है कि उसकी पत्नी अन्य पुरुषों के साथ अश्लील चैटिंग और न्यूड वीडियो कॉल करती थी। इन्हीं आरोपों को साबित करने के लिए उसने CCTV कैमरा लगवाया और फुटेज को CD के रूप में कोर्ट में पेश किया।
महासमुंद फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि CCTV फुटेज वाली CD के साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-B का प्रमाणपत्र नहीं दिया गया है, इसलिए इसे सबूत नहीं माना जा सकता।
इसके उलट, पत्नी की दांपत्य अधिकारों की बहाली की याचिका स्वीकार कर ली गई थी।
पति ने फैमिली कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के दोनों आदेश रद्द कर दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट अधिनियम, 1984 की धारा 14 और 20 के तहत फैमिली कोर्ट को यह अधिकार है कि वह विवाद के प्रभावी निपटारे के लिए तकनीकी कमियों के बावजूद साक्ष्य स्वीकार कर सकती है।
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट को निर्देश दिए हैं कि बेडरूम CCTV फुटेज वाली CD को रिकॉर्ड पर लिया जाए और उस पर जिरह (क्रॉस-एग्ज़ामिनेशन) की अनुमति दी जाए। साथ ही पति-पत्नी से जुड़े दोनों मामलों की नए सिरे से सुनवाई कर शीघ्र निर्णय लिया जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मामला चार साल से अधिक समय से लंबित है, इसलिए फैमिली कोर्ट इसे प्राथमिकता के आधार पर जल्द निपटाए।
यह केस निजता, वैवाहिक अधिकार और डिजिटल सबूतों की स्वीकार्यता जैसे संवेदनशील मुद्दों पर नई बहस खड़ी करता है। अब सबकी नजर फैमिली कोर्ट की दोबारा होने वाली सुनवाई और उसके अंतिम फैसले पर टिकी है।
Updated on:
27 Jan 2026, 12:24 PM IST
Published on:
27 Jan 2026, 12:24 PM IST
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