
रायगढ़। गौशाला में गायों की हो रही मौत पर अब लोगों के कान खड़े होने लगे हैं, ऐसे में जब अपने शहर में गायों की स्थिति को खंगालने की कोशिश की गई तो स्थिति अब तक सामने आए केस से भिन्न दिखी। गौशाला में हो रही मौतों का जिम्मेदार जहां संचालक बन रहा है वहीं यदि रायगढ़ की बात की जाए तो यहां पर जिस गति से गौवंश या गाय सड़कों पर रौंदी जा रही हैं उसमें जिम्मेदार पशुपालक ही नजर आ रहे हैं।
लोगों की लापरवाही की ये दास्तां हम नहीं बल्कि उर्दना में बने गौसेवा केंद्र के आंकड़े दे रहे हैं। वहां से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक साल में केवल शहर के अंदर 100 मवेशी जिसमें गाय और गौवंश दोनों शामिल हैं दुर्घटना के शिकार हुए हैं। इसमें से 30 गायों की मौत हो चुकी है जबकि अन्य को देखने उनके पालक भी नहीं पहुंचे।
शहर के उर्दना तिराहा में गौ-सेवा केंद्र के नाम से मवेशियों का अस्पताल बनाया गया है। यहां अब तक सड़क हादसे में घायल होकर साल भर में 100 मवेशी लाए गए हैं जिसमें से 50 को स्वस्थ्य कर गरीब किसानो ंको बांट दिया गया है। 30 मवेशी की मौत हो चुकी है। बाकि के मवेशी इसी केंद्र में हैं जिनका हाल जानने उनके स्वामी या मालिक आज तक नहीं पहुंचे हैं।
ऐसे में अब इन स्वस्थ हो चुके मवेशियों को फिर से गरीब किसानों को देने की प्रक्रिया चल रही है। गौर करने वाली बात यह है कि ये संख्या केवल रायगढ़ निगम क्षेत्र की है और उन मवेशियों की है जिनके घायल होने की सूचना इस केंद्र को प्राप्त हुई है कहा यह भी जा रहा है कि ऐसे मवेशियों की संख्या भी काफी अधिक होगी जिनके घायल होने की सूचना उन्हें नहीं मिल पाती है और उनकी मौत हो जाती है, ऐेस में यह आंकड़ा बढ़ भी सकता है।
45 के सर्कल का मिलता है सहयोग
हर माह यहां घायल मवेशियों के इलाज, चारा व कर्मचारियों के वेतन मिलाकर मोटा रकम खर्च होती है। समिति के पदाधिकारी बताते हैं कि ४५ मित्रों का सर्कल बना हुआ है जो कि हर माह स्वेच्छा से इस मद के लिए राशि जमा करता है। इस राशि का उपयोग मवेशियों के इलाज व अन्य खर्च में किया जाता है।
एक और केंद्र खोलने की तैयारी
बताया जाता है कि गौ-सेवा केंद्र पूरे जिले में खोलने की तैयारी है। वर्तमान बड़े भंडार में भी एक और गौ-सेवा केंद्र खोलने की तैयारी चल रही है। बताया जाता है कि यहां भवन निर्माण का कार्य चल रहा है जिसके बाद यहां भी गायों के सेवा करने का काम किया जाएगा। इसकी तैयारी भी अपने अंतिम चरणों में है।
गौसेवा केंद्र से इन मवेशियों को थोड़ी राहत
गौ-सेवा केंद्र के नाम से समय-समय पर प्रचार प्रसार किया जाता है। किसी क्षेत्र में घायल मवेशी गाय,बैल या बछड़े की सूचना मिलने के बाद केंद्र के कर्मचारी डॉक्टर के साथ मौके पर पहुंचते हैं और फिर मवेशी का ईलाज करते हैं। प्रारंभिक इलाज के बाद और जरूरत नहीं होने पर छोड़ दिया जाता है गंभीर या फिर रूटीन इलाज की आवश्यकता होने पर केंद्र लाकर इलाज कराया जाता है।
यहां खामोश होते हैं कथित गौरक्षक
इस मामले में कथित गौ भक्त या रक्षक भी खामोश नजर आते हैं। उन्हें ट्रकों में लोड मवेशी कत्ल के लिए जाते तो दिखते हैं पर भारी वाहनों की रेलमपेल के बीच सड़क पर भटकते गौवंश नजर नहीं आते हैं। उनकी ओर से अब तक कोई ऐसा प्रयास नहीं किया गया है जिसमें आवारा घूम रहे मवेशी के मालिकों को समझाने का कार्य किया गया हो, या उनके खिलाफ आंदोलन किया गया हो। यहां तक कि इन गौवंश की सुरक्षा के लिए कभी ये मांग नहीं उठाई गई कि इन्हें उठाकर इनके मालिकों पर कार्रवाई हो या फिर कांजीहाउस में डाल दिया जाए।
-इस मामले में सबसे ज्यादा जिम्मेदार पशुपालक है जो अपनी गायों को सड़क पर छोड़ रहा है इसके बाद प्रशासन है जिसने चारागाह की व्यवस्था तो दूर जो चारागाह थे उसे खत्म होने में साथ दिया , हमारे यहां यदि दुधारू गाय आई तो उसे लेने उसके मालिक आ जाते हैं, लेकिन बूढ़ी और बीमार तो उनके मालिक यहां कभी नहीं आते- अमित शर्मा, संस्थापक गौ-सेवा केंद्र
-शहर के अंदर या फिर आस-पास क्षेत्रों से आवारा मवेशियों के घायल होने की सूचना पर टीम जाती है। उसे गौ सेवा केंद्र लाकर ईलाज किया जाता है जिसके बाद गरीब किसानों को दे दिया जाता है। 45 मित्रों का सर्कल बना हुआ है जिनके सहयोग से उक्त केंद्र संचालित किया जा रहा है- किरण शर्मा, उपाध्यक्ष गौ-सेवा केंद्र
Updated on:
26 Dec 2017 11:33 am
Published on:
26 Dec 2017 11:27 am
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