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चक्रधर समारोह : नौवीं संध्या कथक की खनकी घुंघरू, तो गजल की मौशुकी में डूबे रहे श्रोता

उस्ताद सखावत हुसैन के द्वारा गजल की प्रस्तुति दी, जिससे पूरा पंडाल झूमने पर मजबूर हो गया।

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चक्रधर समारोह : नौवीं संध्या कथक की खनकी घुंघरू, तो गजल की मौशुकी में डूबे रहे श्रोता

चक्रधर समारोह के मंच पर ओडिशी नृत्य की प्रस्तुति देते कलाकार।

रायगढ़. चक्रधर समारोह की नौवीं शाम कथक के साथ गजल की महफिल सजी थी। जिसका लोगों ने भरपूर आनंद उठाया। नौवीं संध्या के इस समारोह में खैरागढ़ की शुभी भंडारी व रायपुर की यास्मीन सिंह के द्वारा कथक की प्रस्तुति दी गई। इससे दर्शक आनंदित हुए। वहीं इसी शाम उस्ताद सखावत हुसैन के द्वारा गजल की प्रस्तुति दी, जिससे पूरा पंडाल झूमने पर मजबूर हो गया।

समारोह के नौवीं शाम की शुरुआत ओडिशा भुवनेश्वर के गुरू बिचित्रानंद स्वाई से हुई। इस कलाकार ने समारोह में ओडिसी की प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति को दर्शकों ने काफी सराहा। वहीं कलाकार का उत्साह वर्धन तालियों की गडग़ड़ाहट से किया। वहीं इसके बाद दूसरी प्रस्तुति कथक की रही। इस कार्यक्रम को खैरागढ़ से आई कलाकार शुभी भंडारी के द्वारा प्रस्तुत की गई।

कलाकार ने कार्यक्रम प्रस्तुत करते हुए दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। इसके बाद तीसरा कार्यक्रम भी कथक का था। रायपुर से आई कलाकार यास्मीन सिंह ने अपने कार्यक्रम प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। इसके बाद रायगढ़ के दि डिवाइन कृष्णा के द्वारा कथक की प्रस्तुति दी गई, जिसे भी काफी सराहा गया। वहीं नौवीं संध्या की अंतिम प्रस्तुति गजल की रही। जिसको रामपुर उत्तर प्रदेश से आए गायक उस्ताद सखावत हुसैन के द्वारा प्रस्तुत किया गया। गजल के इन नग्मों से श्रोता देर रात तक पंडाल में झूमते रहे।

ओडिशी नृत्य घर-घर में पहुंच रही : पूर्णाश्री राउत
ओडिशी नृत्य अब घर-घर पहुंच रहा है। इस कला की ओर मौजूदा समय में काफी लोगों का ध्यान आकर्षित किया गया है। हालांकि कुछ समय पहले इस तरह की स्थिति नहीं थी, लेकिन अब इस नृत्य के प्रति लोगों की मानसिकता बदल गई है। यह कहना है ओडिशी नृत्यांगना पूर्णाश्री राउत का। वे चक्रधर समारोह में कार्यक्रम प्रस्तुत करने यहां पहुंची थी।
चक्रधर समारोह की नौवीं संध्या कार्यक्रम प्रस्तुत करने पहुंची ओडिशी नृत्यांगना पूर्णाश्री राउत का कहना था कि प्रदेश सरकार के द्वारा भी शास्त्रीय संगीत व नृत्य को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। हालांकि शास्त्रीय संगीत व नृत्य को आगे बढ़ाने के लिए इस प्रयास से वे संतुष्ठ नहीं है।
उनका मानना है कि इस प्रयास को और भी ज्यादा किया जाना चाहिए। शास्त्रीय नृत्य में फ्यूजन को लेकर उनका कहना था कि शास्त्रीय संगीत हमारी संस्कृति है और इस संस्कृति में मिलावट नहीं किया जाना चाहिए। इसकी वजह से वे आज भी बिना फ्यूजन के परंपरागत ओडिशी नृत्य करती है। वहीं चक्रधर समारोह के इस कार्यक्रम को लेकर उनका कहना था कि यह बहुत बड़ा मंच है। वहीं कहा कि इस मंच पर कार्यक्रम प्रस्तुत करने से जो संतुष्ठि मिलती है वह किसी और मंच पर नहीं मिल पाती।

जब छूटी नृत्य तब मां हुई निराश- प्रेसवार्ता के दौरान पूर्णाश्री राउत के साथ उनकी मां मीरा पटनायक भी पहुंची थी। इस दौरान उन्होंने बेटी के इस मुकाम पर पहुंचने की काफी खुशी जाहिर की। वहीं यह बताया गया कि शादी से पहले नृत्यांगना नृत्य करती थी, लेकिन शादी के बाद कुछ समय के लिए नृत्य उनसे दूर हो गया था। इस समय उनकी मां मीरा पटनायक काफी दुखी हुई, लेकिन इसके बाद नृत्य जब फिर से शुरू हुई तो उन्हें वहीं खुशी दोबारा मिली, जो पहले थी।