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रायगढ़

जुनियर डाक्टरों के भरोसे संचालित हो रहा मेकाहारा का गायनिक विभाग

0 स्वीकृत पद से काफी कम डाक्टर दे रहे सेवा० सीनियर डाक्टरों की कमी के चलते उपचार में आ रही समस्या

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रायगढ़. जिले के सबसे बड़े संत बाबा गुरुघासीदास चिकित्सालय के गायनिक विभाग में सीनियर डाक्टरों की भारी कमी बनी हुई है, जिससे यहां उपचार कराने आने वाले गायनिक मरीजों की देख-रेख जूनियर डाक्टर कर रहे हैं। वहीं जानकारों की मानें तो यहां १२ डाक्टरों की पद स्वीकृत है, लेकिन मात्र तीन डाक्टर ही काम कर रहे हैं, जिससे दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
गौरतलब हो कि जिले में मेडिकल कालेज अस्पताल शुरू होने के बाद जिलेवासियों को यह उम्मीद थी कि अब उपचार के लिए लोगों को इधर-उधर भकटने की जरूरत नहीं पड़ेगी, ऐसे में यहां उपचार के लिए रायगढ़ जिला के अलावा जांजगीर-चांपा, सक्ती, सारंगढ़, जशपुर जिला के अलावा पड़ोसी राज्य ओडिशा से भी हर दिन बड़ी संख्या में उपचार के लिए मरीज यहां आते हैं। जिसको देखते हुए अस्पताल की सुविधाओं में काफी विस्तार भी किया गया है, लेकिन विशेषज्ञों की कमी पूरा नहीं हो पाने के कारण मरीज और जो विशेषज्ञ हैं उनको काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार तो ऐसी स्थिति निर्मित हो जाती है कि सीनियर डाक्टरों को लगातार दो शिफ्ट में काम करना पड़ जाता है, जिससे वर्कलोड अधिक होने के कारण मानसिक तनाव की स्थिति उत्पन्न होने लगती है, जिसका खामियाजा मरीज व उसके परिजनों को भुगतना पड़ता है। वहीं कई बार ऐसी स्थिति निर्मित होती है कि रात के समय कोई सीनियर डाक्टर नहीं होने के कारण कोई गंभीर मरीज आता है तो जुनियर डाक्टरों के समझ से बाहर हो जाता है, जिससे मरीजों को रेफर करने की जरूरत पड़ जाती है।
स्वीकृत पद से कम है डाक्टरों की पोस्टिंग
जानकारों की माने तो संत बाबा गुरुघासीदास चिकित्सालय के गायनिक विभाग में 12 डाक्टरों की पोस्ट है, लेकिन वर्तमान में यहां मात्र तीन डाक्टर ही हैं। ऐसे में इस अस्पताल के शुरू हुए करीब एक साल से अधिक हो गया, लेकिन अभी तक 09 पद अभी भी खाली है। ऐसे में जो तीन डाक्टर पदस्थ है, इनकी जिम्मेदारियों भी ज्यादा है, जिससे इनका वर्कलोड बढऩे से कई बार तनाव की भी स्थिति उत्पन्न हो जा रही है। हालांकि जूनियर डाक्टर होने के कारण मरीजों को काफी राहत है, नहीं तो यहां आने वाले मरीजों को भारी समस्या का सामना करना पड़ जाता। वहीं कई बार सीनियर डाक्टर नहीं होने के कारण गंभीर मरीज आने पर दूसरे अस्पताल रेफर करने की जरूरत पड़ जाती है, जिससे मरीज व परिजन दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
लगातार बढ़ रही मरीजों की संख्या
जब से मेडिकल कालेज अस्पताल अपने नए भवन में शिफ्ट हुआ है, तब से लोगों में बेहतर उपचार की लालसा को लेकर यहां हर दिन बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। जिनको बेहतर उपचार प्रदान करने पदस्थ डाक्टर हर संभव प्रयास करते हैं, लेकिन कई बार स्थिति ऐसी बनती है कि वर्कलोड के कारण तनाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसे में देखा जाए तो रात के समय यहां एक भी सीनियर डाक्टर नहीं रहते, ऐसे में अगर कोई गंभीर मरीज आते हैं तो उसकी स्थिति को देखते हुए कॉल पर डाक्टरेां को बुलाया जाता है, रेफर करने की जरूरत पड़ जाती है।
क्या कहते हैं अधिकारी
इस संबंध में मेडिकल कालेज अस्पताल के अधिकारियों कहना है कि यहां सेटअप के अनुसार लगभग सभी विभाग में डाक्टरों सहित कर्मचारियों की कमी है। जिसके लिए उच्चाधिकारियों को लगातार पत्राचार कर मांग की जा रही है, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण पोस्टिंग नहीं हो पाने के कारण समस्या हो रही है। वहीं बताया जा रहा है कि मरीजों की संख्या को देखते हुए पदस्थापना बहुत जरूरी हो गया है।