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बिजली चोरी के मामले में कोर्ट ने सुनाया इतना कड़ा फैसला

एक साल कारावास की सजा सुनाई है साथ ही 6 लाख 67 हजार रुपए के अर्थदंड

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एक साल कारावास की सजा सुनाई है साथ ही 6 लाख 67 हजार रुपए के अर्थदंड

रायगढ़. बिजली चोरी के मामले में कोर्ट ने आरोपी को एक साल कारावास की सजा सुनाई है साथ ही 6 लाख 67 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा दी है। इसमें चार लाख 383 रुपए अर्थदंड है जबकि दो लाख 66 हजार 922 रुपए सिविल दायित्व का है। ये फैसला विशेष न्यायाधीश व अपर सत्र न्यायाधीश के तृतीय न्यायाधीश आशिष पाठक के कोर्ट से आया है। जबकि इस मामले में बिजली कंपनी की ओर से पंचानन गुप्ता ने पैरवी की थी।


मिली जानकारी के अनुसार मामला लैलूंगा के ग्राम तारागढ़ का है। मिली जानकारी के अनुसार मामला 24 नवंबर 2011 का है जब बिजली विभाग की टीम ने तारागढ़ गांव के श्यामलाल पटेल पिता चंदन पटेल के यहां दबिश दी थी। इसमें यह पाया कि यहां पर घरेलू प्रयोजन के लिए बिजली का कनेक्शन लिया गया था जबकि एलटी लाइन से अनाधिकृत रूप से डायरेक्ट हुकिंग कर पांच एचपी क्षमता के हॉलर का उपयोग किया जा रहा था।


इस प्रकार बिजली चोरी की पुष्टि होने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। बिजली विभाग की कार्रवाई व जांच में यह पाया गया कि आरोपी की ओर से विभाग को एक लाख 33 हजार रुपए का चूना लगाया गया था। ऐसे में मामले को कोर्ट में पेश किया गया। लगभग छह साल बाद इस मामले में फैसला आया है। जिसमें कोर्ट ने आरोपी को एक साल कारावास सहित दो अलग-अलग धाराओं में छह लाख 67 हजार रुपए का जुर्माना ठोंका है।


बहस में ये कहा
इस मामले में अभियुक्त की ओर से कोर्ट में इस बात की दलील पेश की गई कि वो निर्दोष है पर साबित नहीं हुआ फिर ये कहा गया कि ये पहला अपराध है साथ ही इसकी उम्र 55 वर्ष है इसलिए उसे न्यूनतम दंड से दंडित किया जाए। वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से यह कहा गया कि ये गंभीर किस्म का अपराध है इस मामले में कठोर दंड दिया जाए।


कोर्ट ने कहा रहम करना उचित नहीं
इस मामले दोनों पक्षों के तर्क को सुनने के बाद कोर्ट की ओर से सख्त टिप्पणी की गई है। कोर्ट ने कहा है कि अभियुक्त के इस कृत्य से यह लगता है कि उसे विधि के शासन का कोई भय नहीं है। इसलिए ऐसी दशा में अभियुक्त के मामले में किसी भी प्रकार से नरमी दिखाना उचित नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया।

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