
रायगढ़. कथक के घराने में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता। यह कलाकार के ऊपर रहता है कि वह अपने नृत्य को कितने बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर सके। यह कहना है कोलकाता से यहां पहुंची कथक नृत्यांगना परामिता मैत्रा का। नृत्यांगना परामिता मैत्रा अपनी टीम के साथ चक्रधर समारोह में कथक की प्रस्तुति देने के लिए शहर पहुंचीं थी।
प्रेसवार्ता के दौरान कथक में कई कलाकारों के द्वारा किए जा रहे फ्यूजन को लेकर पूछे गए एक सवाल पर उनका कहना था कि कथक में फ्यूजन का दौर चल रहा है। वहीं अधिकांश कलाकार फ्यूजन कर रहे हैं, लेकिन कथक के मूल नृत्य प्रभावित नहीं हो इतना ही फ्यूजन किया जाना चाहिए।
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मौजूदा समय में कथक को तोड़मरोड़ कर मंच पर प्रस्तुत किए जाने के सवाल पर उनका कहना था कि कथक पैर पटकने और घूमने से कथक नहीं हो जाता। इसके लिए अथक परिश्रम किया जाता है। इसके बाद ही कथक की सीख मिलती है, वहीं कथक को तोड़मरोड़ कर पेश करने वाले अपने आप को पापुलर करने के लिए ऐसा करते हैं। कथक प्राचीन नृत्य कला है, लेकिन अभी भी कई लोग इसे समझ नहीं पाते। इस सवाल के जवाब पर उनका कहना था कि यदि किसी को यह डांस समझ में नहीं आता तो यह कलाकार की कमी है। कलाकार को चाहिए कि वह ऐसा नृत्य करे कि सभी दर्शक को आसानी से समझ में आ सके। वहीं उनका कहना था कि कथक ही ऐसा नृत्य है कि जिसमें पहले ही यह बता दिया जाता है कि वे मंच पर किस विद्या से क्या प्रस्तुत करने जा रहीं हैं।

तब मिलती है आत्मसंतुष्टि
प्रेसवार्ता के दौरान परामिता मैत्रा का कहना था कि एक कलाकार को आत्म संतुष्ठि तब मिलती है, जब वह जितना अपने गुरु से सीखा उससे कहीं ज्यादा वह अपने शिष्यों को सिखाए। इसके अलावा चक्रधर समारोह को लेकर उनका कहना था कि यह मंच काफी बड़ा है। इस मंच पर आना उनके व उनकी टीम के लिए गर्व की बात है।