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मां का अंतिम संस्कार करने 1100 किमी की कठिन यात्रा कर घर पंहुचा जवान

बीजापुर के माओवादी मोर्चे पर तैनात हैं सीएएफ जवान, बीजापुर से उत्तरप्रदेश के चुनार का सफर तीन दिन में पूरा किया

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मां का अंतिम संस्कार करने 1100 किमी की कठिन यात्रा कर घर पंहुचा जवान

मां का अंतिम संस्कार करने 1100 किमी की कठिन यात्रा कर घर पंहुचा जवान

रायपुर . छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित बीजापुर जिले में तैनात छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सीएएफ के जवान संतोष यादव (30)ने अपनी मां का अंतिम संस्कार करने के लिए लगभग 1100 किलोमीटर की पैदल यात्रा की। संतोष उत्तरप्रदेश के मिर्जापुर जिले के चुनार इलाके के सीकर गांव के निवासी हैं। हालांकि जवान ने इस दौरान मालगाड़ी, ट्रक और नाव का भी सहारा लिया। जवान ने कहा, अपनी मां की मृत्यु के बारे में जानने के बाद अपने गांव सीकर पहुंचने के लिए बेताब थे। उनके छोटे भाई और एक विवाहित बहन दोनों मुंबई में रहते हैं, जिनका लॉकडाउन के कारण गांव पहुंचना संभव नहीं था। पिता गांव में अकेले थे। संतोष की पत्नी और दो बच्चे गांव में रहते हैं। संतोष 2009 में सीएएफ में शामिल हुए थे। वह 15वीं बटालियन में तैनात हैं।

चुनार तक आठ मालगाडि़यां बदली
संतोष ने बताया कि मैंने अपने गांव के सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन चुनार तक पहुंचने के लिए कम से कम आठ माल गाडि़यों को बदला। सभी स्टेशन मास्टर्स और रेलवे में काम करने वाले मेरे दोस्तों की बदौलत मैं 10 अप्रैल की सुबह चुनार पहुंच गया। संतोष ने गंगा नदी तक पहुंचने के लिए पांच किमी पैदल यात्रा की और नाव से गंगा पारकर अपने गांव पहुंच गए।

कई जगह रोका
संतोष यादव ने बताया कि तालाबंदी के कारण उन्हें कई स्थानों पर पुलिस और रेलवे कर्मियों द्वारा रोका गया, लेकिन मानवीय आधार पर उन्हें आगे बढऩे की अनुमति मिलती गई। उन्होंने कहा, मेरे गांव के 78 लोग रेलवे में काम कर रहे हैं और मुझे पता था कि यात्रा के दौरान वे मेरी बहुत मदद कर सकते हैं। यात्रा के दौरान इतनी कठिनाइयों के बावजूद, संतोष यादव का कहना है कि वह लॉकडाउन का समर्थन करते हैं क्योंकि यह लोगों की सुरक्षा के लिए लगाया गया है।