
रायपुर में परिवारों पर पीलिया की मार, 130 के पार पहुंचा पॉजीटिव मरीजों का आंकड़ा
रायपुर . राजधानी में पीलिया का दंश झेल रहे लोग इलाज कराते-कराते कर्ज में डूब चुके हैं। वहीं कोर्ट में सारी व्यवस्थाएं बनाने का दावा करने वाला प्रशासन पीडि़तों की कोई मदद नहीं कर रहा है।
‘पत्रिका’ टीम से चर्चा के दौरान पीडि़त परिवारों का दर्द छलक उठा। 45 वर्षीय परमेश्वर सागर बुक बाइंडिंग का कार्य करते हैं, उनके परिवार में दो बच्चों (17-18 वर्ष) समेत उन्हें भी पीलिया होने पर दो माह से इलाज करा रहे हैं। इस दौरान वे न तो नौकरी पर जा सके और न जिम्मेदारों ने उनकी कोई आर्थिक मदद की। इससे उनका इलाज सहित कुल कर्ज 25 हजार रुपए के लगभग पहुंच गया है, जिसे अब वे किसी तरह चुकाएंगे।
वहीं, साहू परिवार के 5 लोग इससे ग्रसित हैं, जो कि पिछले एक माह से डॉक्टरों का चक्कर लगा कर 20 हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। उनके परिवार के 8 से 25 वर्ष तक के बच्चे पीलिया से प्रभावित हैं। शशि साहू नामक एक गृहणी ने बताया कि उनके पुत्र रोहन साहू (16 वर्ष) को पीलिया हुआ था।
रायपुर के कलक्टर ओपी चौधरी ने कहा कि शासकीय अस्पतालों में मरीजों के लिए पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश सीएमएचओ को दिए गए हैं। साथ ही स्मार्ट कार्ड के माध्यम से भी इलाज में आर्थिक सहायता मिल पा रही है।
रायपुर के सीएमएचओ डॉ. केएस शांडिल्य ने कहा कि हमने जिला अस्पताल और आंबेडकर में मरीजों की व्यवस्था बनाई है। उनके लिए समय पर गाड़ी की भी व्यवस्था की जा रही है।
इसी बीच पिछले दिनों इस आपदा में अपनी जान गंवा चुकी गर्भवती देवांगन महिला के परिवार के लोगों ने भयवश किराए के उस मकान को ही खाली कर दिया है। आसपास के निवासियों ने बताया कि उनका परिवार उनकी मौत से व्यथित था और संक्रमण परिवार के अन्य सदस्यों को न हो इसे देखते हुए उन्होंने मकान खाली कर दिया। वहीं मृतक प्रेम यादव के परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है, वे परिवार में इकलौते कमाने वाले थे। उनके जाने से परिवार संघर्षमय जीवन व्यतीत करना पड़ रहा है।
निगम की ओर से 15 हजार से अधिक प्रभावितों को जल आपूर्ति के लिए महज 3 स्थायी व 2 रनिंग टैंकर लगाए गए हैं, जो कि नाकाफी हैं। साथ ही निगम कोर्ट में जवाब पेश किया कि उनकी ओर से 3 मई तक 31 टैंकर व 4 मई देर शाम तक 28 टैंकर सप्लाई की गई। ‘पत्रिका’ के पिछले अंक में लोगों के पानी नहीं भरने की खबर प्रकाशित की गई थी। आज भी पड़ताल में कई परिवारों ने टैंकर आने से इंकार कर दिया।
प्रशासनिक लापरवाही का शिकार हो रहे मरीजों का विश्वास स्वास्थ्य विभाग से भी भरोसा उठ गया है। इस इलाके के संभावित मरीज शिविरों के बजाए निजी अस्पतालों में जाकर जांच और इलाज करा रहे हैं, जिस वजह से स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन को उनकी कोई जानकारी ही नहीं मिल पा रही है। एेसे में वे मरीज फालोअप के लिए शिविरों में पहुंच रहे हैं और उनकी संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। कोर्ट कमिश्नरों के दौरे तक यह आंकड़ा १०४ था। ‘पत्रिका’ से चर्चा के दौरान शिविर में तैनात डॉक्टर ने 130 से अधिक पॉजीटिव मरीज होने की बात स्वीकारी।
राजधानी के मोवा नहरपारा में पीलिया फैलने के मामले में शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने बताया कि टैंकर से जो पानी सप्लाई किया जा रहा है, उसके भी गंदे होने की जानकारी मिल रही है। इस पर मुख्य न्यायाधीश टीबी राधाकृष्णन तथा न्यायमूर्ति शरद कुमार गुप्ता की युगलपीठ ने पर्यावरण संरक्षण मंडल और नगर पालिक निगम को टैंकरों से सप्लाइ किए जा रहे पानी की जांच कराने का निर्देश देते हुए सोमवार को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए।
निगम ने सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखते हुए बताया कि शुक्रवार शाम तक प्रभावित इलाकों में तीन स्थाई टैंकर लगाए गए हैं और इनमें शुक्रवार शाम तक 28 टैंकर पानी की सप्लाइ की गई है। गौरतलब है कि पिछले दिनों निगम की ओर से पेश किए जवाब में लोगों को 31 टैंकरों से पानी पहुंचाने की जानकारी दी गई थी।
‘पत्रिका’ टीम ने गुरुवार को निगम की ओर से मिट्टी व जंगयुक्त पानी पिलाने की खबर प्रकाशित किया था। मामले को संज्ञान में लेते हुए कोर्ट ने जांच के आदेश दिए हैं। शुक्रवार को भी ‘पत्रिका’ टीम ने भ्रमण के दौरान इसी तरह के टैंकरों से पानी सप्लाई करते हुए पाया।
Published on:
05 May 2018 11:34 am
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