
दुनियाभर में मौजूद 20 फीसदी ऑक्सीजन अमेजॉन के जंगलों से आता है। यही वजह है कि इन्हें विश्व का फेफड़ा कहा जाता है। ठीक इसी तरह 17 हजार हैक्टेयर में फैले हसदेव के जंगल भी छत्तीसगढ़ के लिए फेफड़ों का काम करते हैं। कोयला निकालने के लिए इन जंगलों को काटा जा रहा है।
इसे बचाने 26 साल की कनक लता सिंह राजपूत (खुशबू) 19 फरवरी को गरियाबंद से पैदल ही हसदेव के लिए निकल पड़ीं। 8 दिन के सफर के बाद मंगलवार को वे अपनी यात्रा के 9वें दिन हसदेव पहुंचीं। पत्रिका से बातचीत में कनक ने बताया, हर दिन 30 से 35 किलोमीटर पैदल चलती थी।
आठ दिनों में 260 किलोमीटर का सफर कर कोरबा तक पहुंची। हसदेव पहुंचने के लिए हरिहरपुर तक जाना था। लेकिन, कोरबा से हरिहरपुर जाने वाली करीब 100 किमी लंबी सड़क घने जंगलों से होकर गुजरी है। लोगों ने टोंका, एक दिन में ये सफर पूरा नहीं होगा। रास्ते में रूकने की जगह भी नहीं मिलेगी।
दिन ढलने के बाद पैदल सफर करना खतरनाक हो सकता है क्योंकि इस रास्ते में हाथी-भालू समेत दूसरे जंगली जानवर खुले में घूमते हैं। कनक ने चूंकि पैदल ही हसदेव तक जाने की ठानी थी, इसलिए पहले तो वह पैदल जाने पर ही अड़ी रहीं। लेकिन, लोगों के बार-बार समझाने पर उन्होंने गाड़ी के जरिए आगे का सफर तय किया।
घरवालों ने मना किया एक हफ्ते में मना लिया
कनक इससे पहले उत्तराखंड में केदार कंठा की 12 हजार फीट से ऊंची चोटी भी फतह कर चुकी हैं। दिसंबर 2023 में उन्होंने यहां क्लाइंबिंग की थी। देश का तिरंगा फहराकर यहां भी हसदेव बचाने की अपील की। उन्होंने तभी तय कर लिया हसदेव तक पदयात्रा करेगी। घरवालों ने पहले तो दो टूक कह दिया, अकेले कहां जाओगी! हालांकि, उन्होने एक हफ्ते में किसी तरह घरवालों को मना लिया।
दोस्तों से कहा, कोई न आया तो अकेले निकली
हसदेव यात्रा शुरू करने से पहले कनक ने अपनी दोस्तों से भी इस बारे में बात की। कुछएक को साथ चलने भी कहा। कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला। इसके बाद उन्होने अकेले ही यात्रा करने का फैसला लिया। कनक बताती हैं, इस यात्रा में उन्हें उनके एक भैया वंश सिन्हा से काफी मदद मिली। वंश ने उनके लिए अलग-अलग जगहों पर रुकने का इंतजाम किया। दूसरी जरूरतों का भी पूरा ख्याल रखा।
हजार लोगों से कहा- पौधे लगाओ-पेड़ बचाओ
कनक बचपन से ही एनसीसी प्रोग्राम और खेलों में एक्टिव रहीं हैं। उनका कहना है कि इसी वजह से रोज 30-35 किमी सफर करने में उन्हें कोई परेशानी नहीं आई। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान बहुत से लोग उनसे मिले। तकरीबन एक हजार से ज्यादा। बहुत से लोग तो इसलिए रूकते थे कि पैदल जा रही लड़की को मदद की जरूरत होगी! कनक ने रास्ते में मिलने वाले सभी लोगों से हसदेव में हो रही कटाई पर चर्चा की। उन्हें हसदेव बचाने के लिए आगे आने और पौधे लगाने-पेड़ बचाने का संदेश भी दिया।
Published on:
28 Feb 2024 05:54 pm
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