
एनआईटी में वर्कशॉप के दौरान उपस्थित एक्सपर्ट और पार्टिसिपेंट्स
रायपुर।बारीक से बारीक डिजाइनिंग के लिए थ्रीडी प्रिंटर यूजफूल रहा है। मेडिकल फील्ड में भी इसका उपयोग होने लगा है। दांतों की बनावट में थ्रीडी प्रिंटिंग की शुरुआत भी हो चुकी है। जल्द ही हड्डियों की डिजाइनिंग भी इसका इस्तेमाल होने लगेगा। यह कहना है आईआईटी भिलाई के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ एस. बंधोपाध्याय का। वे एनआईटी में 3 डी प्रिंटिंग और डिजाइन इन इंजीनियरिंग एप्लीकेशन पर नेशनल वर्कशॉप में बोल रहे थे। मेटलर्जिकल एंड मैटेरियल्स इंजीनियरिंग और मैकेनिकल इंजीनियरिंग, एनआईटी द्वारा आयोजित पांच दिवसीय वर्कशॉप की शुरुआत सोमवार को 11 बजे हुई। यह कार्यशाला एआईसीटीई ट्रेनिंग एंड लर्निंग (एटीएएल) शैक्षणिक कार्यक्रम के तहत प्रायोजित है। हाइब्रिड प्रोसेसेज, डिज़ाइन फॉर एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, प्रोसेस प्लानिंग फॉर अद्दितीवे मैन्युफैक्चरिंग, पोस्ट प्रोसेसिंग ऑपरेशन्स, प्रोडक्ट क्वालिटी कण्ट्रोल आदि सब्जेक्ट पर चर्चा होगी।
रिफ्लिका बनाकर तैयार होंगी बोन्स
गंगोपाध्याय ने कहा कि कई बार हड्डियां चकनाचूर हो जाती हैं। ऐसे में थ्रीडी प्रिंटर की मदद से टूटी हड्डी के बराबर जैसे लेफ्ट हैंड की हड्डी टूटी हो तो राइट हैंड की बोन को स्कैन किया जा जाता है। इसी तरह बॉडी के किसी भी भाग की हड्डियां डिजाइन हो सकती हैं। हालांकि विदेशों में यह तकनीक चल रही है, आगे चलकर भारत मेंं इसकी शुरुआत हो सकती है।
क्रिटिकल काम होंगे आसान
एरो स्पेस इंजीनयिरंग में थ्रीडी प्रिंटिंग का यूज किया जाता है। इसमें टर्बाइन में खर्च ज्यादा आता है। टर्बाइन को बारीकी से तैयार किया जाता है। इस तकनीक के इस्तेमाल से क्रिटिकल काम आसान हो जाएगा। अभी इसका यूज पेसेफिक फाम में चल रहा है। इन फ्यूचर थ्रीडी प्रिंटर इंडस्ट्रलाइज हो जाएगा। मैकेनिकल डिपार्टमेंट के डॉ मृदुल सिंह राजपूत ने थ्रीडी पिं्टर की प्रॉब्लम व सॉल्यूशन पर जानकारी दी। उन्होंने नोजल डिजाइन, हाई स्पीड डिजाइन, डिपोजिशन मैथेड के बारे में बताया।
Published on:
04 Dec 2019 12:25 am
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
