
कन्या हायर सेकंडरी स्कूल की छात्राएं कक्षा में खड़े-खड़े पढऩे-लिखने को मजबूर
गरियाबंद। जिला मुख्यालय स्थित 1976 में बना शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। इस स्कूल से गरियाबंद समेत आसपास के गांवों की कई पीढिय़ां पढ़ कर निकल गई हैं। लेकिन आज गरियाबंद जिला बनने के बाद भी स्कूल अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। बावजूद इसके जिले के किसी भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि ने अब तक इसकी सुध नहीं ली है। वर्तमान में हालत ऐसे है कि हायर सेकंडरी की छात्राओं को कक्षा में पढ़ाई-लिखाई खड़े होकर करनी पड़ रही है। शासन-प्रशासन जिम्मेदारों और जनप्रतिनिधियों के उपेक्षित रवैए के चलते तीन वर्ष से यह स्थिति बनी हुई है।
आत्मानंद स्कूल शुरू होने के बाद कन्या शाला और पूर्व बालक प्राथमिक शाला को मिलाकर दोनों स्कूलों की स्टडी होती है। तीन नए कमरे बनाने के चलते 3 वर्ष पहले कन्या शाला के हॉल समेत कुल 9 कमरों को तोड़ दिया गया और तीन नए कमरों का निर्माण नगर पालिका के ठेकेदारों के माध्यम से शुरू किया गया। मगर, अब तक पूर्ण नहीं किया गया है। हालत ऐसे हैं कि 3 कमरे बनाने के बाद भी बच्चों को पढऩे के लिए दिक्कत रहेगी। छात्राएं पिछले 3 वर्षों से अव्यस्था के बीच पढ़ाई कर रही हैं। पूर्व छात्राओं ने कहा कि इससे अच्छी स्थिति तो जिला बनने के पहले थी।
3 वर्ष बाद भी कमरों का निर्माण अधूरा
कन्या शाला में जिन कमरों का निर्माण 6 माह में करके देना था, वह लगभग 3 वर्ष बीतने के बावजूद अधूरे हैं। आत्मानंद में 8 माह पूर्ण होने वाले कमरे 10 माह बाद भी आधे नहीं बने हैं। कन्या उच्चतर शाला में नगर पालिका के माध्यम से 2 ठेकेदारों ने 3 नए कमरे बनाने का काम लिया थ । जिसमे ऊपर नीचे दो कमरों का निर्माण एक ठेकेदार के द्वारा तथा एक अन्य कमरे का निर्माण दूसरे ठेकेदार के द्वारा होना था। परंतु एक कमरे का निर्माण जिस एजेसी को मिला था उन्होंने उसे पेटी कांट्रेक्ट के माध्यम से दूसरे ठेकेदार को दे दिया है। उस ठेकेदार के द्वारा लेंटर नहीं किए जाने के चलते दूसरे ठेकेदार का भी काम रुका हुआ है। नगर पालिका के एग्रीमेंट के मुताबिक काम को 6 माह में पूरा करके हैंडओवर करना था, मगर 3 वर्ष होने के बाद भी निर्माण कार्य अधूरा है। इसी तरह आत्मानंद स्कूल में आरईएस विभाग के माध्यम से 3 कमरे नीचे और 3 कमरे ऊपर कुल 6 कमरे 8 माह में बना कर देना था। मगर 10 माह बीत जाने के बाद भी नीचे के तीन कमरे ही बने हैं, जिसमें अभी लेंटर होना बाकी है। जिसके चलते आत्मानंद स्कूल के बच्चे भी अव्यवस्थाओं में पढऩे को मजबूर हैं।
खुले में लगती है क्लास और बिना छत होता है प्रेक्टिकल
वर्तमान में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला में कमरों की कमी के चलते बच्चों को खुले आसमान के नीच बैठकर पढऩा पड़ता है। वहीं हायर सेकंडरी की छात्राओं को भी खुले आसमान के नीचे प्रेक्टिकल करना पड़ता है। कक्षा 12वीं छात्राओं ने बताया किअभी ठंड का समय है तो हम लोग कैसे भी एडजस्ट करके बाहर खुले में पढ़-लिख लेते हैं। लेकिन बारिश और गर्मी के समय हमको काफीपरेशानी होती है।
710 छात्राएं साथ में पढऩे को मजबूर
क्लासरूम की कमी के अलावा कन्या शाला में शिक्षकों की भी कमी है । वर्तमान में कन्या शाला में 607 छात्राएं हायर सेकंडरी की और 103 मिडिल स्कूल की हैं । जिसके एक ही समय में सुबह 7.30 बजे से 11.45 तक मिडिल और हाईस्कूल की कक्षा लगती हैं। जिसमें केवल 12वीं कक्षा में 238 छात्राएं हैं। जिनको हिंदी इंग्लिश की क्लास के समय खड़े होकर पढऩा-लिखना पड़़ता है। 50 बच्चों की क्षमता वाली कक्षा में 130 से 140 बच्चे पढऩे आते हैं। जो छात्राएं पहले आ जाती हंै वे बैठ जाती हैं, जो बच जाती हैं वे पूरे समय तक खड़ी होकर लिखती-पढ़ती है। शिक्षको की कमी के चलते अध्ययन वअन्य गतिविधियां नहीं हो पाती हैं।
वर्जन
ठेकेदार के द्वारा काम को लेकर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कुछ समय पहले उनके द्वारा एक्सटेंशन लिया हुआ है। हालांकि, निर्धारित समयावधि में कार्य पूर्ण नहीं हुआ है। आज ही ठेकेदार को रिमाइंडर नोटिस जारी किया गया है।
- नवीन चंद्राकर, एसडीओ, आरईएस
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काम क्यों रुका है जांच करवाता हूं। अगर छात्राओं को पढ़ाई-लिखाई में इतनी समस्या हो रही है तो नियमानुसार कार्यवाही कर जल्द निर्माण शुरू करवाते हैं।
- थमसान रात्रे, सीएमओ, नगर पालिका गरियाबंद
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छात्राओं की संख्या के हिसाब से कमरों की कमी तो है ही। दो पालियों में एक साथ स्कूल लगाने के कारण बच्चों की पढ़ाई भी ठीक से नहीं हो पाती है।
- एच. आर. साहू, प्रभारी प्राचार्य
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अगले सत्र तक समस्या का निदान हो जाएगा। मेरी जानकारी में है। जल्द निर्माण कराने को भी कहा गया है।
- प्रभास मालिक, कलेक्टर
Published on:
17 Jan 2023 04:56 pm
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