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Bastar Census: बस्तर के विकास की नींव बनेगी जनगणना, 63 हजार कर्मियों की ड्यूटी तय, पूछेंगे 34 सवाल

Bastar Census: आगामी जनगणना बस्तर के विकास के लिए अहम मानी जा रही है। परीक्षा के बाद अप्रैल के दूसरे सप्ताह में इसकी तैयारी शुरू होगी।

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बोर्ड के मूल्यांकन पर पड़ेगा असर (photo source- Patrika)

बोर्ड के मूल्यांकन पर पड़ेगा असर (photo source- Patrika)

Bastar Census: केंद्र सरकार के निर्देश के बाद छत्तीसगढ़ में जनगणना की तैयारी तेज हो गई है। स्कूलों की परीक्षा होने के बाद अप्रैल के दूसरे सप्ताह में प्रदेश के मकानों की जनगणना का काम शुरू हो जाएगा। इसके लिए लगभग 63 हजार प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों के अतिरिक्त अन्य प्रशासनिक कार्मिकों की भी आवश्यकता होगी। यानी एसआईआर के बाद शिक्षकों को मकानों की गणना के लिए घर-घर दस्तक देनी होगी।

Bastar Census: इस बार डिजिटल जनगणना

इस दौरान मकानों से जुड़ेे 34 तरह के सवालों का जवाब देना होगा। इससे बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं के मूल्यांकन पर भी असर पड़ेगा। जनगणना की तैयारियों को लेकर पिछले दिनों मुख्य सचिव की मौजूदगी में राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की बैठक हुई थी। इसमें तैयारियों को लेकर विस्तार से निर्देश दिए गए थे। आगामी परीक्षाओं और मूल्यांकन को ध्यान में रखते हुए बीच का रास्ता निकालने की तैयारी की जा रही है। बता दें कि इस बार डिजिटल जनगणना होगी।

बारिश के दौरान बढ़ेगी मुश्किल

जनगणना 2027 के पहले चरण में मकान-सूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य 1 अप्रैल से 30 सितम्बर 2026 के बीच 30 दिन में करना प्रस्तावित है। स्कूली बच्चों की पढ़ाई, मानसून आदि को ध्यान में रखते हुए इसकी कार्ययोजना तैयार की जा रही है। माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में 15 अप्रैल के बाद मकानों की गणना का काम शुरू होगा।

इसे 15 मई तक पूरा करना होगा। क्योंकि इस बीच छत्तीसगढ़ में मानसून शुरू हो जाएगा। मानसून की वजह से दूरस्थ अंचलों में पहुंच मार्ग को लेकर काफी दिक्कत खड़ी हो जाती है। छत्तीसगढ़ में बस्तर संभाग के कुछ क्षेत्रों में तो दो-तीन महीने पहले ही राशन की व्यवस्था करनी पड़ती है।

शैक्षणिक कैलेंडर में करना होगा बड़ा बदलाव

जनगणना 2027 के द्वितीय चरण में जनसंख्या गणना का कार्य पूरे देश में एक साथ फरवरी 2027 में किया जाएगा। यानी इसका सीधा असर अगले साल होने वाली स्थानीय और बोर्ड परीक्षा में पड़ेगा। इसे ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग वर्ष 2026-27 का शैक्षणिक कैलेंडर तैयार करेगा। ऐसे में बोर्ड परीक्षाओं में थोड़ी देरी भी हो सकती है। यदि ऐसा होता है, तो इसका सीधा असर अन्य प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं पर भी पड़ेगा।

बस्तर की सही तस्वीर लाने में मिलेगी मदद

Bastar Census: यह जनगणना बस्तर के विकास के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगी। अभी तक जितनी भी जनगणना हुई है, उसमें बस्तर में जाना बहुत मुश्किल था। जंगल और रोड कनेक्टिविटी नहीं होने से परेशानी होनी थी। इसके अलावा नक्सलवाद का भी खतरा रहता था। अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। नक्सलवाद का तेजी से सफाया हो रहा है। इसके अलावा विकास काम भी तेज से हो रहे हैं। इस कारण बस्तर में जगणना के सटीक आंकड़े मिलने में आसानी होगी। क्योंकि जनगणना के आंकड़ों से ही विकास कार्यों को लेकर कार्ययोजना बनाई जाएगी।

ऑनलाइन जानकारी देने पर मिलेगा टोकन नम्बर

भारत की जनगणना 2027 देश की प्रथम डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल ऐप के माध्यम से जानकारी एकत्र की जाएगी। साथ ही संपूर्ण कार्य की मॉनीटङ्क्षरग एवं प्रबंधन वेब-पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। इस बार जनगणना में कोई भी व्यक्ति स्वयं-गणना कर सकता है।

इसके तहत कोई भी व्यक्ति जनगणना से जुड़ी वेबसाइट पर जाकर अपनी पूरी जानकारी भर सकता है। इसके आधार पर उसे टोकन नम्बर मिलेगा। जब जनगणना के लिए कर्मचारी उनके पास पहुंचेंगे तो उन्हें टोकन नम्बर बताना होगा। इसके आधार पर प्रगणकों का डेटा क्रॉस चेंक करेंगे और संतुष्ट होने पर ओके करेंगे।