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आठवीं पास किसान का जुगाड़, जानवरों से फसल बचाने निकाला अनोखा तरीका

विज्ञान दिवस पर जानिए कृषि मेले में आए सारंगढ़ के किसान की घरेलू तकनीक

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आठवीं पास किसान का जुगाड़, जानवरों से फसल बचाने निकाला अनोखा तरीका

खीरसागर ने कृषि मेले में अपनी जुगाड़ टेक्नोलॉजी को एग्जीबिट किया।

ताबीर हुसैन @ रायपुर। जुगाड़ शब्द सुनने में जितना उपयोगी लगता है उससे कहीं ज्यादा इसका असर नजर आता है। खीरसागर पेशे से किसान हैं। उन्होंने सिर्फ आठवीं तक की पढ़ाई की है लेकिन जुगाड़ तकनीक के चलते अपने खेतों को जानवरों से सुरक्षित रखने का अनोखा तरीका निकाल लिया है। 28 फरवरी को विज्ञान दिवस मनाया जाता है। जरूरी नहीं कि भारी-भरकम खोज को ही विज्ञान का दर्जा दिया जाए। आपका हुनर अगर सिस्टेमेटिक है तो वह भी किसी साइंस से कम नहीं। विज्ञान दिवस पर आज हम आपको सारंगढ़ के किसान खीरसागर पटेल का इनोवेशन शेयर कर रहे हैं। हाल ही में राजधानी से लगे गांव तुलसी-बाराडेरा में कृषि मेले का आयोजन किया गया। इसमें खेती से जुड़ी नई तकनीकों से किसानों को रूबरू कराया गया। इन्हीं में से एक जुगाड़ तकनीक थी खीरसागर की। उन्होंने पंखे के मोटर और खाली पीपे से एक अलर्ट सिस्टम बनाया है। जिससे कि खेतों की रखवाली बिना किसी व्यक्ति के की जा सकती है।

यूं आया आइडिया खीरसागर

दलहन-तिलहन और सब्जी-भाजी की खेती करता रात में जानवरों से फसल को बचाए रखने के लिए उन्हें रतजगा करना पड़ता था। दिक्कत ये थी कि कई बार नींद लग जाती थी और जानवर सब्जियों की फसल चट कर जाते थे। सिर के पास खाली टिपा और लकड़ी रखता। समय-समय पर उसे बजाता। एक रात जब वह रखवाली करते हुए सो गया तो जानवरों ने सब्जियों को काफी नुकसान पहुंचाया। नींद खुलने के बाद वह निराश हुआ लेकिन ठान लिया कि कोई स्थायी उपाय खोजना होगा। घर पर लेटे-लेटे भी वे यही सोचता रहा कि ऐसा क्या किया जाए इस प्रॉब्लम से निजात मिले। तभी उसकी नजर सिलिंग पंखे पर गई। इसके बाद तो मानो उसका वैज्ञानिक दिमाग की बत्ती जल उठी।

घर का पंखा खोल दिया

खीरसागर ने घर का पंखा खोला। उसकी पंखुडिय़ों को अलग किया। घर में रखे तेल के खाली पीपे निकाले। बाड़ी में रखे बांस उठाया और खेत पहुंच गया। पंखुडिय़ों से एक छोटी सी संकल जोड़ी। बिजली कनेक्शन से पंखे की मोटर तक वायरिंग की और दबा दिया बटन। संकल राउंड होते हुए खाली पीपे से टकराने लगा और इससे आवाज आने लगी। रात में इसे चालू कर दिया और खुद घर पहुंच चैन की नींद लेने लगा। सुबह बड़ी उत्सुकता के साथ खेतों का रूख किया। फसल को सही-सलामत देख कभी खुद पर गर्व करता तो कभी अपनी ईजाद खुश होता। यह खबर आसपास के गांवों में पहुंची तो सभी देखने आने लगे। इस आइडिए से इंस्पायर होकर कई किसानों ने इस जुगाड़ को अपनाया।