
जैन दीक्षा अंगीकार कर हिमांशी बनी साध्वी प्रवज्या श्रीजी व मुक्ताबनी साध्वी प्रभावना श्रीजी
नवापारा राजिम। रत्नाकर दीक्षा महोत्सव के अंतर्गत रविवार को जैन श्वेतंाबर मंदिर परिसर में मुमुक्षु हिमंाशी सुराना व मुमुक्षु मुक्ता डाकलिया ने स्नात्र पूजा संपन्न कर लापसी लूट के कार्यक्रम को संपादित किया। इसके बाद अपने-अपने निवास से महानिक्रमण यात्रा के माध्यम से दीक्षा रंग मंडप में गाजते-बाजते पहुंची। जहां पर आचार्य भगवंत श्रीजिनपियूषसागर सूरिजी म.सा. ने विशाल समवसरण के सामने मंगलाचरण फरमाकर दीक्षा विधि प्रारंभ की। सर्वप्रथम साधु साध्वियों के आवश्यक 14 उपकरणों पर आचार्यश्री ने वाछपेछ डाला। इसके बाद दीक्षार्थी परिवारों द्वारा आचार्यश्री को रजोहरण प्रदान किया गया।
इस अवसर पर आचार्यश्री ने कहा कि सच्चा श्रावक वही है जो हाथ में नहीं तो कम से कम रजोहरण को हृदय में ग्रहण करे। मुमुक्षुु बहनों देवाधिदेव की अंतिम बार नवांगी पूजा की और स्वर्ण के साथ पुष्पों की बारिश से देवाधिदेव को बधाया जिसके पीछे उनकी आत्मा स्वर्ण की भांति उज्ज्वल हों और पुष्प की भांति सुगंध व कोमलता का वरण हो, ऐसी उनकी भावना थी। इसके बाद ही दीक्षार्थी बहनों ने सामयिक के उपकरण अपने परिवार वालों को अर्पण किए, जिसका उपयोग वे नित्य करें। जिसके बाद आचार्यश्री ने दोनों मुमुक्षुओं की रजारोहण प्रदान किया। रजोहरण मिलते ही वे देव गुरुवंदन करते हुए नृत्य करने लगी। मानों वर्षों की आस पूरी हो गई।
इस प्रसंग पर आचार्यश्री ने कहा कि अंजनशलाका विधि के बाद ही कोई भी मूर्ति पूज्यनीय बनती है। वैसे ही जब तक कोई संयम जीवन संगीकार नहीं करता बह नमस्कार महामंत्र में स्थान प्राप्त नहीं कर सकता। संपत्ति लुटा देने वाला मिनीर घोर तपस्या करने वाला साघक, अखंड ब्रहमचर्य का पालन करने वाला भी पंच परमेष्टी में पद प्राप्त नहीं कर सकता। यह संयम साधना की पूर्णता नहीं प्रारंभ है। मनोहर वाटिका में सम्मिलित होने वाली दोनों मुमुक्षु आत्माओं पर गुरुकृपा सदा बनी रहे। यही मंगल भावना व शुभकामना आज ही खरतरगच्छाचार्य पूज्य जिनउदय सागर सूरीजी म.सा. का दीक्षा दिवस व मेहतरा पद विभूषिता श्रध्देय मनोहर श्रीजी म.सा. का शताब्दी जन्म महोत्सव के उपलक्ष्य में मुमुक्षु बहनों एवं भाइयों व्दारा चित्र में माल्यार्पण व वंदन कर अपनी श्रध्दांजलि व पुष्पांजलि अर्पित किए।
सरलता का प्रतीक थे मनोहरश्रीजी : प्रियंकराश्रीजी
बसंत पंचमी के अवसर पर पूज्य प्रियंकरा श्रीजी म.सा. ने कहा कि आपका यह परम सौभाग्यशाली दिवस माता सरस्वती का जन्म दिन भी है। आचार्यश्री जिनउदय सागर सूरिजी म.सा. का दीक्षा दिवस व महतरा गुरुवर्या श्रीमनोहर श्रीजी म0 सा0 शताब्दी जन्म दिवस भी प्रारंभ हो रहा है। गुरुवर्या श्रीजी ने अपने 60 वर्ष के छत्तीसगढ़ प्रवास पर छत्तीसगढ़ के कोने कोने में विचरण कर इस धर्महीन सी बंजर भूमि को अपने दिव्य उपदेश से सिंचित किया और इसे धर्मधान्यपूर्ण हरा भरा बनाया। छत्तीसगढ़ की 36 बालाओं को दीक्षित कर उन्हें संसार में भटकने से बचाया। धर्मप्रभावनाओं के कारण आपको शेखावटी पद्मश्री, भारतविभूति, शासन दीपिका, छत्तीसगढ़ रत्न शिरोमणी विभिन्न अॅलंकरणों से नवाजा गया।
घोषणाएं व आयोजनों की जानकारी
महत्वपूर्ण घोषणा के अंतर्गत केवल्यधाम महासमुन्द्र के कोठारी परिवार की विनती पर आचार्यश्री ने विजय वसुषमा कोठारी को दीक्षा की अनुमति प्रदान करते हुए आगामी 10 फरवरी (महासमुन्द्र) का मुहुर्त प्रदान किया। ज्ञातव्य रहे कि विजय कोठारी दंपत्ति विगत 20 वर्षों से केवल्यधाम तीर्थ सेवा में रत है। इसके अलावा कोठारी दंपत्ति साधु साध्वी वेयावच्च अथवा परमात्मभक्ति व साधार्मिक भक्ति करने में महारत हासिल है। केवल्यधाम में निर्माण होने वाले विशाल भोजनशाला के भूमिपूजन एवं शिलान्यास का मुहूर्त आगामी 17 फरवरी घोषित किया। इसी दिन सभी दीक्षार्थीयों की बड़ी दीक्षा का महोत्सव भी केवल्यघाम की पावनभूमि में होगा। नमीउण तीर्थ में देवाधिदेव का प्रथम पाषाण शिला रखने का मुहुर्त 18 फरवरी का दिया गया। इसी प्रकार बालाघाट नगरी में नूतनजिनालय के भूमिपूजन एवं शिलान्यास का मुहुर्त आगामी 18 फरवरी का दिया गया। आज के मंगल प्रसंग पर स्थानीय सोनराज लीलादेवी अजय कोचर व मनोहरमल अशोक संचेती परिवार द्वारा 1000 स्वायरफीट जगह जिनालय के लिए देने की घोषणा की गई। ओसवाल परिवार व ं भोपाल श्रीसंघ की विनती को ध्यान में रखते हुए मुमुक्षु प्रभुति ओसवाल की दीक्षा का मुहुर्त आगामी 17 अप्रैल (भोपाल) आचार्यश्री ने दिया। धमतरी, न्यू राजेन्द्र नगर, दुर्ग, बालाघाट राजनांदगांव आदि श्रीसंघों की विनती परचातुर्मास की घोषणा 17 अप्रैल को केवल्यथाम तीर्थ में बृहद दीक्षा महोत्सव पर आचार्यश्री के मुखार वृंद से की जाएगी।
वेश परिवर्तन व नूतन नामकरण
मुमुक्षु हिमांशी सुराना वमुमुक्षु मुक्ता डाकलिया द्वारा संसार रंगविरंगी वेशभूषा को त्यागकर संयम एवं वैराग्य का प्रतीक श्वेत वस्त्रों को धारणकर रंगमंडप में आई। दीक्षा के विधी विधान पूर्ण किए गए। चौविहार उपवास का पंचख्यान हुआ। कई लोगों ने इस अवसर पर एकासवा व्यासना आयंबिल उपवास के पचख्यान लिए। आचार्यश्रीजी गच्छ परंपरा का पालन करते हुए नवदीक्षीत हिमांशी का नया नाम प्रवज्याश्रीजी व मुक्ता को प्रभावना श्रीजी म.सा. व (सुशिष्या पू. प्रियंकरा श्रीजी का) दिया गया। नवदीक्षितों द्वारा सकल संघ की मांगलिक प्रदान करने के बाद पूज्य आचार्यश्री ने सभी को मंगलपाठ सुनाया। इसके बादपूज्य गुरु भगवंत एवं नवदीक्षित साध्वियंा मंदिर दर्शन के लिए रवाना हुए।
दर्शन के लिए विधायक धनेन्द्र साहू पहुंचे
रत्नाकर दीक्षाा महोत्सव रंगमंडप में दीक्षा विधि के चलते स्थानीय विधायक धर्मेन्द्र साहू व नगरपालिका अध्यक्ष धनराज मध्यानी गुरु भगवंत के दर्शनार्थ पहुंचे । धनेन्द्र साहू ने कहा कि दीक्षा महोत्सव नगर के लिए एक पावन अवसर है। गुरु भगवंतों के दर्शन वंदन कर मैं धन्य हो गया। नवदीक्षितों को शुभकामना देते हुए उन्होंने उनके संयमित दिनों के उत्तरोत्तर वृध्दि की कामना की।
Published on:
07 Feb 2022 04:52 pm
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
