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सेट पर पापा भूल जाते थे कि मैं उनका बेटा हूं

‘मया होगे रे’ के एक्टर भूपेश चौहान बोले

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सेट पर पापा भूल जाते थे कि मैं उनका बेटा हूं

पिता शेखर चौहान के साथ भूपेश चौहान।

ताबीर हुसैन @ रायपुर। किसी भी पिता के लिए खुशी का लम्हा तब होता है जब वह अपने बेटे को आगे बढ़ता हुआ देखता है। कहा भी गया है कि जब बेटे का जूता पिता के पैर में आए तो वे दोस्त हो जाते हैं। आज हम एक ऐसे युवा से रूबरू करा रहे हैं जो पिता का दोस्त ही नहीं बल्कि शिष्य भी हैं। 22 वर्षीय भूपेश चौहान छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘मया होगे रे’ से डेब्यू कर रहे हैं जो कि 2 सितंबर को रिलीज हो रही है। खास बात यह कि फिल्म को उनके पिता शेखर चौहान ने ही डायरेक्ट किया है। भूपेश के साथ छालीवुड के जाने-माने एक्टर प्रकाश अवस्थी भी हैं।

बचपन से शूट पर जाता था

मैं बचपन से पापा के साथ शूट पर गया। तब से मुझे इस फील्ड में रुचि जागी। पापा ने कभी नहीं कहा कि तुम्हें फिल्म इंडस्ट्री में ही आना है। उन्होंने मुझे पूरी आजादी। उनका कहना था कि जो भी करना पूरे मन से। मुझे इस बात की खुशी है कि पहली फिल्म उनके ही निर्देशन में मिली। सेट पर वे यह भूल जाते थे कि मैं उनका बेटा हूं। वहां मैं एक आर्टिस्ट ही होता था। जैसे सबसे ट्रीट करते वैसा मेरे साथ भी किया करते।

डांट ऐसी कि पहले कभी नहीं खाई

मैंने अब तक की उम्र में पापा से कभी डांट नहीं खाई लेकिन शूट के दौरान वे जरा भी अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं करते थे। वे वहां गुरु की भूमिका में होते और डांटने में कभी गुरेज नहीं करते। मुझे याद है कि आज तक मुझे ऐसी डांट नहीं मिली होगी जो शूट के टाइम मिली। उनका फोकस हमेशा काम पर रहा है। उनके मैंने तीन रूप देखे हैं। पिता, गुरु और दोस्त। शूटिंग के अनुभव पर कहा कि बड़े सितारों के साथ काम करने का अच्छा अनुभव रहा है। उनसे मैंने काफी कुछ सीखा। एक्टिंग के सवाल पर कहा कि यूट्यूब से शुरुआत हुई थी। इससे पहले मोंटू की मोहब्ब्त में भी अभिनय कर चुका हूं लेकिन फिल्म रिलीज नहीं हुई।