
सबसे बड़े अस्पताल में मानवता हुई शर्मसार, आंखें निकालकर लावारिस की तरह फेंक दिया शव
रायपुर. राजधानी के आंबेडकर अस्पताल में एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाली घटना प्रकाश में आई है। दरअसल, मामला मर्च्यूरी की है। टाटीबंध निवासी 43 वर्षीय कौशल गुप्ता को मंगलवार की दोपहर अचानक हार्टअटैक आ गया था। परिजन उपचार के लिए उनको लेकर एक निजी अस्पताल पहुंचे। निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने कौशल को मृत घोषित कर पुलिस का मामला बताकर परिजनों को पोस्टमॉर्टम कराने के लिए आंबेडकर अस्पताल भेज दिया।
कौशल के शव को लेकर शाम करीब 5 बजे परिजन आंबेडकर अस्पताल के मर्च्यूरी में पहुंचे। यहां पर परिजनों ने कौशल के नेत्र को दान करने की सोची। उन्होंने डॉक्टरों को अवगत कराया। डॉक्टरों ने नेत्र निकालकर ज्यादा समय होने का हवाला देकर बुधवार को पोस्टमॉर्टम करने की जानकारी परिजनों को दी। परिजन भी इसके लिए तैयार हो गए।
बुधवार की सुबह परिजन जब मर्चुरी में पहुंचे तो देखा कि कौशल का शव लावारिस की तरह पड़ा हुआ था। उनके शरीर को कपड़े से ढंका तक नहीं गया था।
परिजनों ने बताया कि डॉक्टर ने कौशल का नेत्र तो निकाल लिया, लेकिन आंख पर पट्टी बांधना भी मुनासिब नहीं समझा। कौशल के इस तरह शव को पड़ा देखकर परिजन सहन नहीं कर सके और मर्चुरी में हंगामा करने लगे। हालांकि, कुछ लोगों की समझाइश पर परिजन शांत हो गए और पोस्टमॉर्टम के बाद शव लेकर चले गए।
आंबेडकर अस्पताल में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। कुछ दिनों पहले आंबेडकर अस्पताल के भीतर बरामदे में एक मरीज दर्द से कराह रहा था लेकिन वहां से गुजरने वाले डॉक्टरों ने सुध तक नहीं ली। जब सोशल मीडिया में यह कारगुजारी वायरल होने लगी तो डॉक्टरों ने मरीज का उपचार करना शुरू किया।
स्वास्थ्य सचिव, संचालक व अस्पताल अधीक्षक तलब
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आंबेडकर अस्पताल के मरच्युरी में हुई घटना को संज्ञान में लेते हुए स्वास्थ्य सचिव, स्वास्थ्य संचालक और अस्पताल अधीक्षक को तलब किया है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर ट्वीट करते हुए मामले में नाराजगी जताते हुए कहा कि ये तस्वीर बदलनी ही होगी।
आम्बेडकर अस्पताल के चौकी प्रभारी एम.आर. धु्रव ने बताया कि शिकायत करने के लिए परिजन पहुंचे थे। उन्होंने लापरवाही का आरोप लगाकर कार्रवाई करने की मांग कर रहे थे। परिजनों को समझाईश देकर किसी तरह शांत कराया गया।
आंख पर नहीं बांधी पट्टी
मर्च्यूरी में लावारिश की तरह शव फेंके जाने से आक्राशित परिजन इसकी शिकायत करने आम्बेडकर अस्पताल के भीतर बने पुलिस चौकी पहुंचे। वहां पर मौजूद चौकी प्रभारी एमआर धु्रव से शिकायत की।
परिजनों ने चौकी प्रभारी को बताया कि डॉक्टरों ने अमानवीयत का परिचय देते हुए शव को बिना कपड़े से ढके वैसे ही छोड़ दिया था। नेत्र तो निकाल लिया लेकिन वहां पर पट्टी भी नहीं बांधी। जबकि, नियम है कि पोस्टमॉर्टम नहीं होने पर शव को फ्रिजर में रखा जाता है। पोस्टमॉर्टम के लिए जब डॉक्टर पहुंचते हैं तब शव को फ्रिजर से बाहर निकाला जाता है।
Published on:
27 Dec 2018 12:44 pm
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