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एम्स में जनरल मेडिसिन विभाग को मिला नया वार्ड, मरीजों के लिए 48 बेड बढ़े

ऑक्सीजन से लेकर वेंटीलेटर तक की समुचित व्यवस्था

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एम्स में जनरल मेडिसिन विभाग को मिला नया वार्ड, मरीजों के लिए 48 बेड बढ़े

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में महिला व पुरुष के लिए 24-24 बेड लगाए गए हैं।

रायपुर. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में जैसे-जैसे मरीजों की संख्या बढ़ रह रही है, वैसे-वैसे सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। मेडिसिन विभाग में मरीजों की बढ़ रही संख्या को देखते हुए डी ब्लॉक की दूसरी मंजिल पर एक नया वार्ड मिल गया है, जो ऑक्सीजन से लेकर वेंटीलेटर तक की व्यवस्था है।

इसमें महिला व पुरुष के लिए 24-24 बेड लगाए गए हैं। नए वार्ड के जुडऩे से विभाग पर मरीजों का दबाव कम हो जाएगा। नए वार्ड का शुभारंभ बुधवार को एम्स के निदेशक प्रो. (डॉ.) नितिन एम नागरकर ने किया। उन्होंने कहा कि विभाग में पिछले कई माह से निरंतर रोगियों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में नए रोगियों को भर्ती करने में चुनौती का सामना करना पड़ता है। जब तक पुराने रोगी वार्ड से डिस्चार्ज नहीं हो पाते थे, तब तक नए को भर्ती नहीं किया जा सकता था। अधीक्षक डॉ. करन पीपरे ने कहा कि जनरल मेडिसिन विभाग में 60 बिस्तर उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त आईसीयू, एचडीयू और इमरजेंसी में मिलाकर 90 बिस्तर हैं। इनमें से 90 प्रतिशत भरे रहते हैं। नए वार्ड में पुरुष और महिला दोनों वार्ड में 24-२४ बिस्तर उपलब्ध रहेंगे। उद्घाटन अवसर पर उप-निदेशक (प्रशासनिक) नीरेश शर्मा, वित्त सलाहकार बी.के. अग्रवाल, डॉ. विनय आर. पंडित, डॉ. मनोज पाराशर, डॉ. प्रीतम नारायन वासनिक सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक और अधिकारी उपस्थित थे।
1 माह में 3700 मरीज पहुंचे

मेडिसिन विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन 150 से 175 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। दिसंबर में विभाग की ओपीडी में 3700 से अधिक मरीजों ने इलाज कराया है। इसमें मलेरिया, डायरिया, उल्टी- दस्त, पेचिश, वायरल और कई अन्य बीमारियों से ग्रस्त मरीज शामिल हैं।

एम्स के छात्र ज्ञान से समाज को करेंगे स्वस्थ और समृद्ध

एम्स के वर्ष 2015 बैच के एमबीबीएस छात्रों ने नए वर्ष की शुरुआत अनूठे अंदाज में करते हुए हिपोक्रेटिक शपथ ली। उन्होंने जीवनभर निरंतर ज्ञान अर्जित करने और अपने जीवन को समाज को स्वस्थ और समृद्ध बनाने के लिए उपयोग करने का संकल्प लिया। मेडिकल छात्रों ने निदेशक डॉ. नितिन एम. नागरकर, अधिष्ठाता (अकादमिक) प्रो. सूर्यप्रकाश धनेरिया, डॉ. आलोक अग्रवाल और कुलसचिव नितिन गायकवाड़ के निर्देशन में हिपोक्रेटिक शपथ ली। नए चिकित्सकों ने वरिष्ठ चिकित्सकों के ज्ञान का सम्मान करने और गंभीर मसलों में बिना किसी हिचकिचाहट के उनकी राय लेने, रोगियों की निजता और जानकारी को गोपनीय बनाए रखने और बीमारियों की रोकथाम के लिए हर संभव कदम उठाने की शपथ ली।