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एम्स रायपुर: कोरोना को मात देने वालों की बन रही क्लीनिकल प्रोफाइल

कोरोना के मरीजों में हल्का संक्रमण, हाईग्रेड फीवर और सांस में तकलीफ के नहीं थे लक्षण

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एम्स रायपुर: कोरोना को मात देने वालों की बन रही क्लीनिकल प्रोफाइल

एम्स रायपुर: कोरोना को मात देने वालों की बन रही क्लीनिकल प्रोफाइल

रायपुर . कोरोना पॉजिटिव 4 मरीजों का सफल इलाज करने के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टर और कर्मचारी का उत्साह चरम पर है। एम्स प्रबंधन अब मरीजों का क्लीनिकल प्रोफाइल तैयार करने में जुट गया है जो कोरोना प्रभावित अन्य राज्यों को शेयर किया जाएगा। अस्पताल के आला अधिकारियों की मानें तो इससे अन्य राज्य के डॉक्टरों को कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज करने में सहुलियत होगी।
डॉक्टरों का कहना है कि एम्स व अन्य जगह पर भर्ती कोरोना पीडि़त मरीजों में हाईग्रेड फीवर और सांस में तकलीफ के लक्षण नहीं पाए गए। मरीजों में संक्रमण भी हल्का (माइल्ड) है, यही वजह है कि अब तक किसी भी मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत नही पड़ी और दवाओं से ही चार मरीजों को ठीक कर डिस्चार्ज कर दिया गया। अन्य मरीजों का भी उसी प्रकार से इलाज किया जा रहा है।
अब आयुष बिल्डिंग में ही आइसोलेशन वार्ड
एम्स में कोरोना वायरस के दो जगहों पर आइसोलेशन वार्ड संचालित किया जा रहा था। समता कॉलोनी की युवती के डिस्चार्ज होने के बाद अब सिर्फ आयुष बिल्डिंग में ही आइसोलेशन वार्ड संचालित होगा। दरअसल, मामला यह है कि शुरुआती दौर में कोरोना वायरस के लिए एम्स के सी ब्लॉक में 12 बिस्तरों का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया। समता कॉलोनी में पहला केस आने पर युवती को सी ब्लॉक में भर्ती कर इलाज किया जा रहा था। कुछ दिनों बाद मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एम्स प्रबध्ंान ने आयुष बिल्डिंग में 500 बिस्तरों का आइसोलेशन वार्ड बनाने से परेशानी हो रही थी।
एम्स रायपुर के निदेशक डॉ. नितिन एम. नागरकर का कहना है कि प्रदेशवासियों के खुशखबर है कि कोरोना पीडि़त एक-एक करके डिस्चार्ज हो रहे हैं। आईसीएमआर की गाइड लाइन से ही इलाज किया जा रहा था। देश में यह पहली बार बीमारी आई है इसलिए क्लिनिकल प्रोफाइल तैयार हो रहा है। अन्य राज्यों के साथ भी शेयर किया जाएगा।