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अब बैंकों ने डिफाल्टरों पर कसा शिकंजा, वसूली की प्रक्रिया हुई तेज

बैंक प्रबंधन का दावा है कि हर महीने लगभग 10 करोड़ की प्रापर्टी सीज के लिए ई-नीलामी का नोटिस जारी किया जा रहा है

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Punjab national bank

अब बैंको ने डिफाल्टरों पर कसा शिकंजा, वसूली की प्रक्रिया हुई तेज

रायपुर. शहर के कई बैंकों में छोटे बकायादारों पर सख्ती और बड़े बकायादारों को जरूरत से ज्यादा मोहलत देने का मामला सामने आ रहा है। सबसे ज्यादा डिफॉल्टर सरकारी बैंकों के सामने आ रहे हैं, जिसके मद्देनजर सरकारी बैंकों ने लोन वसूली की प्रक्रिया तेज की है, लेकिन इसमें अपेक्षानुरूप सफलता नहीं मिल पा रही है।

आमतौर पर छोटे बकायादारों से ऋण वसूलने में बैंकों की तत्परता अधिक नजर आती है, लेकिन बड़े डिफॉल्टरों को मौका दिए जाने की वजह से जहां एनपीए की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। यह मामला भी सामने आ रहा है, जिसमें लोन देने के बाद अब बकायादारों के पते नहीं मिल रहे हैं। इसमें बड़े बकायादार भी शामिल हैं। एनपीए की संख्या बढऩे से सबसे अधिक परेशानी आम लोगों को हो रही है, जिसे बैंकों की ओर से लोन देने में आना-कानी की जा रही है। इधर सरकारी बैंकों के आला अधिकारियों का कहना है कि बड़े बकायादारों के खिलाफ भी रिकवरी अभियान तेज कर दिया गया है।

पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने हाल ही में 21 करोड़ रुपए की लोन वसूली में सफलता पाई है। बैंक के मुताबिक रायगढ़ की एक स्पंज आयरन कंपनी ने 48 करोड़ का लोन लिया था, जिसमें 21 करोड़ वसूले गए। इस मामले को बैंक प्रबंधन ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में दिया। इस पर लंबी सुनवाई चली।

ऋण वसूलने में कामयाब नहीं हो सके बकाया के बाद भी मिल रहा टारगेट बैंकों के हालात यह है कि एक तरफ जहां ऋण वसूली का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है, दूसरी तरफ बैंक प्रबंधन ने अपने ही अधिकारी-कर्मचारियों को लोन बांटने का टारगेट थमा दिया है, जिसमें बैंक अधिकारी-कर्मचारी पहले से लोनधारकों को आसान प्रक्रिया में ज्यादा से ज्यादा लोन देने का वादा कर रहे हैं।

बैंक प्रबंधन का दावा है कि हर महीने लगभग 10 करोड़ की प्रापर्टी सीज के लिए ई-नीलामी का नोटिस जारी किया जा रहा है। निविदा के माध्यम संबंधितों की प्रापर्टी को नीलाम किया जा रहा है। निविदा में सबसे ज्यादा बोली लगाने वालों को सम्पत्ति का अधिकार सौंपा जाता है।

पंजाब नेशनल बैंक के मंडल प्रमुख राजीव खेड़ा ने कहा कि पहली तिमाही में बैंक को बड़ी रिकवरी हासिल करने में कामयाबी हासिल मिली है। नियमों के तहत बड़े बकायादारों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में कई मामलों को सौंपा गया है।

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