
एनिमल वाटिका में कस्तुरी बल्लाल अपनी टीम के साथ (लेफ्ट से फोर्थ)
ताबीर हुसैन @ रायपुर. लोग अपने पालतू जानवरों खासतौर पर डॉगीज का तो ख्याल रख लेते हैं लेकिन सडक़ पर घूमने वाले जानवरों पर कोई ध्यान नहीं देता। उन्हें लोग प्यार करने से कतराते हैं। हर साल 11 अप्रैल 'नेशनल पेट डे यानी राष्ट्रीय पालतू दिवस' के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मकसद लोगों को पालतू व सडक़ पर मौजूद जानवर को प्यार और देखभाल करने के प्रति जागरूक करना है। शहर की कस्तुरी बल्लाल इस काम को बखूबी कर रही हैं। एनिमल वाटिका फाउंडेशन के बैनरतले वे चंदखुरी में हॉस्पिल चला रही हैं। उन्होंने आईसीयू डेवलप किया है जहां उनकी टीम द्वारा रेस्क्यू किए जा रहे डॉगीज का इलाज किया जाता है। अभी इस शेल्टर होम में 180 डॉग हैैं जिनका इलाज चल रहा है।
कोई सरकारी मदद नहीं
कस्तुरी ने बताया, इस कार्य के लिए हमने कोई सरकारी मदद नहीं ली है। यह काम अभी शुरुआती स्तर पर चल रहा है जो कि धीरे-धीरे विस्तृत होगा। हमारा काम कुत्तों और बिल्लियों के लिए है। अगर कोई डॉग डिसएबल्ड हो जाए तो हमारे शेल्टर होम में ताउम्र रह सकता है। हम स्ट्रीट एनिमल्स पर फोकस करते हैं क्योंकि पेट होम के लिए शहर में दर्जनों अस्पताल हैं।
पहला रेबीज सस्पेक्टेड
हाल ही में हमने पहला रेबीज सस्पेक्टेड डॉग का सेंपल बैंगलूरु भेजा है। ऐसे कुत्तों को दफनाना तो दूर कोई उठाता भी नहीं है। डॉगीज के लिए हम मल्टी सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल तैयार कर रहे हैं। हमने हाल ही में यूके के एक एनजीओ के साथ मिलकर 120 कुत्तों की नसंबदी भी कराई है। हमारा कार्यक्षेत्र नगर निगम क्षेत्र नहीं है बल्कि ऐसे इलाके हैं जहां कुत्तों के लिए कोई सुविधा नहीं है।
इंजीनियर की, नौकरी छोड़ रेस्क्यू से जुड़ गईं
कस्तुरी ने इंजीनियरिंग की है। उन्हें बचपन से एनिमल से लगाव था। इसलिए वे नौकरी छोड़ रेस्क्यू से जुड़ गईं। पहले वे अकेले रेस्क्यू किया करती थीं लेकिन उनके साथ एनिमल लवर जुड़ते गए और एक अच्छी टीम तैयार हो गई।
Published on:
10 Apr 2023 09:57 pm
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