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मंत्रियों की नाराजगी के बीच मंत्रिपरिषद ने दी अपील समिति के गठन को मंजूरी

मंत्रिपरिषद में हुआ फैसला अनिवार्य सेवानिवृत्ति मामले में हो सकेगी सुनवाई

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मंत्रियों की नाराजगी के बीच मंत्रिपरिषद ने दी अपील समिति के गठन को मंजूरी

रायपुर . राज्य सरकार ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामले में अफसरों और कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में अनिवार्य सेवानिवृति के मामलों में शासकीय सेवकों के अपील पर विचार करने के लिए समितियों के गठन का निर्णय लिया गया।

इससे जिन अफसरों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है, उन्हें सुनवाई का एक मौका दिया जाएगा। हालांकि मंत्रिपरिषद की बैठक में जब यह प्रस्ताव लाया गया, तो कई मंत्रियों ने इस पर नाराजगी भी जताई। मालूम हो कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामले में सबसे बड़ी कार्रवाई पुलिस विभाग में की गई है। इसे लेकर सरकार पर आदिवासियों की उपेक्षा का आरोप भी लगा था। इस मामले में कुछ अफसरों ने न्यायालय में याचिका दायर कर रखी है।

यह है नाराजगी की वजह : दरअसल, 2017 में मंत्रिपरिषद की बैठक में अपील के प्रावधान में संशोधन कर दिया गया था। मंत्रियों की आपत्ति इस बात को लेकर थी कि जब दोबारा समिति बनानी थी, तो इसे हटाने का क्या मतलब था। मंत्रियों के तीखे विरोध को देखते हुए मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग के प्रस्ताव पर अनुमोदन हो सका।

1- विभागाध्यक्षों से प्राप्त अभ्यावेदनों पर विचार के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित होगी। इसमें वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव तथा विधि विभाग के प्रमुख सचिव सदस्य होंगे। सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव इस समिति के सदस्य व सह-संयोजक होंगे।

2- प्रथम और द्वितीय श्रेणी सेवा के अधिकारियों के अभ्यावेदनों पर विचार करने के लिए गठित समिति में मुख्य सचिव द्वारा नामांकित अपर मुख्य सचिव अध्यक्ष होंगे। समिति में संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव या सचिव सदस्य व सह-संयोजक होंगे और सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव या सचिव सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।

3- तृतीय और चतुर्थ श्रेणी सेवा के कर्मचारियों के अभ्यावेदनों पर विचार करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव की अध्यक्षता में समिति का गठन किया जाएगा। समिति में प्रशासकीय विभाग के सचिव सदस्य होंगे और संबंधित विभाग के विभागाध्यक्ष सदस्य व सह-संयोजक होंगे।