
बालोद. प्रदेश का पहला श्रमदान से तैयार रेलवे हाल्ट स्टेशन भैंसबोड़ में शुक्रवार को पहली बार पैसेंजर ट्रेन रूकी, तो आसपास के 20 गांवों की खुशी देखते बन रही थी। यह 20 साल पुरानी मांग जो थी। बालोद जिला मुख्यालय से 9 किमी दूर ग्राम भैंसबोड़ में इस स्टेशन पर ट्रेन रूकी तो ग्रामीणों की भीड़ ने दौड़कर पहले ट्रेल को फूलों के हार से स्वागत किया।
इस स्टेशन में बड़ी संख्या में सुबह से लोग इकट्टे होकर ट्रेन के आने का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही 12.15 बजे दुर्ग की ओर से टे्रन आती दिखी, तो लोग झूम उठे। वे एक-दूसरे को बधाई देने लगे और जैसे ही ट्रेन रूकी, तो हाथों में फूलों का हार लिए दौड़ पड़े और वे ट्रेन का स्वागत किया।
प्रथम दिन टिकट लेकर 100 लोगों ने की यात्रा
२० साल पुरानी मांग पूरी होने पर इस दौरान ग्रामीणों को सपने जैसा लग रहा था। बड़ी संख्या में स्टेशन में मौजूद लोग दूर तक पटरी पर नजर गड़ाए हुए थे, जैसे ही 12.15 बजे ट्रेन आती दिखी तो लोग उछल पड़े और जैसे ही स्टेशन पर रूकी तो लोगों की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। क्योंकि यहां पैसेंजर ट्रेन पहली बार जो रुकी थी। यहां तीन मिनट रूककर १२.१८ बजे ट्रेन रवाना हो गई। ग्रामीणों की इस मेहनत को रायपुर रेलवे ने भी सलाम किया है। कुछ दिनों पहले मिली सूचना से लोगों में काफी खुशी थी, इतनी खुशी कि लगभग १०० लोगों ने टिकट लेकर यात्रा की।
दो दशक बाद सपना हुआ पूरा
ग्रामीणों के लिए शुक्रवार का दिन किसी सपने से कम नही था, क्योंकि ग्राम भैंसबोड़ में रेलवे स्टेशन व पैसेंजर ट्रेन के रूकने की मांग ग्रामीण 20 साल से कर रहे थे, जो खुद की पहल और श्रमदान के बाद अब जाकर पूरा हुआ। अब ग्राम भैंसबोड़ में भी ट्रेन रुकने से आसपास के 20 गावों के लोगों को सस्ता व सुलभ यात्रा करने में आसानी होगी।
मिलेगी सस्ती और सुलभ सफर की सुविधा
बता दें कि भैंसबोड़ का यह पैसेंजर हाल्ट स्टेशन प्रदेश का पहला स्टेशन है जिनको ग्रामीणों ने श्रमदान करके बनाया है। भैंसबोड़ रेलवे स्टेशन से पहले दिन 100 लोगों में बालोद जिला पंचायत अध्यक्ष देवलाल ठाकुर भी शामिल थे। कहा यह आदिवासी बाहुल्य व जंगल क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए बड़ी सौगात है। अब यहां पास के ग्रामीणों को सस्ता व सुलभ सफर मिलेगा।
रेलवे दे ही दी सस्ती यात्रा की खुशी
ग्राम पंचायत भैंसबोड़ के सरपंच घनाराम ठाकुर ने बताया ग्रामीणों की 20 वर्षों से मांग चली आ रही थी कि यहां भी ट्रेन रुके और लोग यहां से सफर करे। इसके लिए ग्रामीणों ने बहुत मेहनत की है और श्रमदान से ही पैसेंजर हाल्ट स्टेशन बनाया। रेलवे ने 20 साल बाद ग्रामिणों को यह ख़ुशी दे ही दी। यहां स्टेशन बनने से आसपास के ग्रामीणों को सफर के मामले में काफी राहत मिलेगी।
उच्च शिक्षा में होगी सहायक
ग्रामीण खिलावन देवांगन ने कहा आज गांव में ख़ुशी का दिन है जिनके लिए 20 साल से मांग कर रहे थे वह आखिरकार पूरी हो गई। अब गांव सहित आसपास के बच्चे उच्च शिक्षा के लिए समय व कम दाम पर दुर्ग-भिलाई आना जाना कर सकते हंै। जानकारी के मुताबिक इस डेमू ट्रेन से चार बार यात्री चढ़ व उतर सकते हैं।
ट्रेन के लिए नहीं जाना पड़ेगा कुसुमकसा
ग्राम भैंसबोड़ जिले के वनांचल में बसा आदिवासी बाहुल्य गांव है। लोगों को ट्रेन से सफर के लिए कुसुमकसा या फिर बालोद तक का सफर तय करना होता था। अब यहां पैसेंजर हाल्ट बन जाने के बाद भैंसबोड़ के अलावा दैहान, बनगांव, दानीटोला, गुजरा, बोरिद, सुवरबोड़, गिधाली, बकलीटोला, सहगांव, गैंजी, पोपलाटोला, बघमार, खोलझर, झरनटोला जाटादाह गांव के लोगों को सुविधा मिलेगी। रेलवे से प्राप्त जानकारी के अनुसार भैसबोड़ में पैसेंजर हाल्ट के लिए बजट कम था, इस पर ग्रामीणों ने मिलकर काम करने की बात कही थी।
बजट कम है कहा, तो ग्रामीणों ने श्रमदान का दिलाया था भरोसा
जानकरी अनुसार स्टॉपेज के हिसाब से रेलवे का सात लाख का बजट कम था, जिससे रेलवे को काम शुरू करने में परेशानी आ रही थी। अधिकारी के वस्तुस्थिति बताए जाने पर भैंसबोड़ और आसपास के 14 गांव के ग्रामीणों ने श्रमदान कर मदद करने की बात कही गई थी जिसके बाद ग्रामीणों ने अधिकारी को भरोसा दिलाया कि वे बारी-बारी से श्रमदान करके स्टॉपेज बनाने में मदद करेंगे और आज उसी मदद से हॉल्ट स्टेशन बनकर तैयार है।
होगा क्षेत्र का आर्थिक-शैक्षणिक विकास
भैसबोड़ में ट्रेन स्टॉपेज बनने से क्षेत्र के ग्रामीणों व विद्यार्थियों को पढ़ाई और इलाज के लिए दुर्ग-भिलाई, रायपुर जाने में भारी राहत मिलेगी। इसके अलावा बहुत से लोगों को रोजगार का साधन भी मिलेगा। लोगों के लिए शहर से आना-जाना आसान हो जाएगा।
Published on:
28 Apr 2018 09:57 am
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