
अनुसूचित जाति की आरक्षित सीटों पर भी चला कांग्रेस का जादू, इन वजहों से बदला माहौल
रायपुर. बस्तर और सरगुजा की आदिवासी सीटों पर एकतरफा जीत के अलावा कांग्रेस का जादू अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों पर भी चला। इस बार 10 में से 7 आरक्षित सीटें कांग्रेस के खाते में गईं।
पिछली बार कांग्रेस को केवल मस्तुरी की एक सीट मिली थी। पिछली बार अनुसूचित जाति की 9 आरक्षित सीटों पर विजयी रही भाजपा को इस बार केवल 2 सीटें मिली हैं। अनुसूचित जाति को आधार वोट बैंक मानने वाली बसपा के खाते में केवल एक सीट गई है। इस टर्नआउट को अनुसूचित जाति वर्ग, खासकर सतनामी समाज में कांग्रेस की बढ़ती स्वीकार्यता के तौर पर देखा जा रहा है।
ऐसा रहा परिणाम
कांग्रेस ने सारंगढ़, सरायपाली, बिलाईगढ़, आरंग, अहिवारा, नवागढ़ और डोंगरगढ़ में जीत दर्ज की है। वहीं भाजपा के खाते में मुंगेली और मस्तुरी की सीटें गई हैं। वहीं पामगढ़ से बसपा ने जीत दर्ज की है।
इन वजहों से बदला माहौल
बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति वर्ग शुरू से कांग्रेस का आधार रहा है। पिछले चुनाव में सतनामी समाज के धर्मगुरु बालदास साहेब ने सतनाम सेना से उम्मीदवार उतारकर भाजपा को फायदा पहुंचाया। वहीं इस वर्ग के किसानों को कांग्रेस के वादे रास आए है। इस बार कांग्रेस ने सतनामी समाज के वोटों को एकजुट रखने की भी पूरी कोशिश की थी।
Published on:
12 Dec 2018 10:34 am
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