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बेरोजगारों से छलावा

22 हजार युवाओं से आवेदन लेने के बावजूद न परीक्षा ली, न 66 लाख रुपए फीस वापस की

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बेरोजगारों से छलावा

प्रदेश में बेरोजगारों से जिस तरह से छल किया जा रहा है वह बेहद चिंतनीय है। परीक्षाओं का विवादों में उलझना, विज्ञापन व परिणामों में गलतियां होना आम बात हो गई है। अब की बार राजधानी रायपुर के दाऊ कल्याण सिंह सुपर स्पेशयालिटी अस्पताल में 22 हजार युवाओं से आवेदन लेने के बावजूद परीक्षा नहीं लेने और 66 लाख रुपए फीस वापस नहीं करने का मामला उजागर हुआ है। हद तो यह है कि इन आवेदकों को दरकिनार कर 9 माह बाद तात्कालिक रूप से अस्पताल शुरू करने के लिए प्लेसमेंट कंपनी सहित अन्य वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए कर्मियों की नियुक्तियां की जा रही हैं। जबकि कुछ दिनों बाद ही व्यापमं द्वारा भर्ती करने से नवनियुक्त कर्मी भी छले जाएंगे।
आवेदन देकर भटक रहे बेरोजगार युवकों का दुख-दर्द शासन-प्रशासन को सुनना चाहिए। उनकी परेशानियां देखनी चाहिए, तो पता चलेगा कि डीकेएस सुपर स्पेशयालिटी अस्पताल प्रबंधन द्वारा परीक्षा नहीं लेने से वे कितने मायूस व हताश हैं। यह पहली बार नहीं है जब प्रदेश के बेरोजगार युवक छले गए हों। विडम्बना है कि नौकरी नहीं मिलने से प्रदेश के कई युवा मानसिक अवसाद के शिकार हो गए हैं। उनका भविष्य अंधकारमय हो गया है। मानसिक व आर्थिक वेदना झेल रहे हैं। फिर भी सरकार गंभीर नजर नहीं आती। एक तरफ प्रदेश के कई सरकारी विभागों में स्वीकृत पदों की तुलना में कई पद रिक्त हैं। यदि शासन गंभीर होता तो इन रिक्त पदों पर बेरोजगार युवक नियुक्त हो गए होते। फलत: सरकारी काम-काज में विलंब नहीं होगा। प्रतिभाएं कुंठित नहीं होतीं। दूसरी ओर संयंत्रों की स्थापना प्रदेश के विकास और प्रदेशवासियों के हित में की गई हैं, लेकिन इसका परिणाम उलटा हो रहा है। औद्योगिक प्रदूषण से लोगों का जीना दुश्वार हो गया है। जल, जंगल, जमीन का विनाश हो रहा है। स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है, सो अलग।
नौकरियां नहीं मिलने से प्रदेश के सैकड़ों युवक-युवतियों की आयु सीमा खत्म हो गई है या फिर खत्म होने के कगार पर है। आखिर शासन-प्रशासन प्रदेश के शिक्षित युवक-युवतियों का भविष्य संवारना चाहता है या बिगाडऩा? युवा वर्ग के भविष्य से खिलवाड़़ करने के लिए जिम्मेदार कौन है? भविष्य में बेरोजगार छले नहीं जाएंगे, इसकी क्या गारंटी है? बहरहाल, सरकार को डीकेएस सुपर स्पेशयालिटी अस्पताल में आवेदकों की नियुक्ति करने की पहल करनी चाहिए। लापरवाह नौकरशाहों को बर्खास्त करना चाहिए। साथ ही प्रदेश के कारखानों में 90 फीसदी स्थानीय बेरोजगारों की भर्ती अनिवार्य करने के लिए शीघ्र ही कानून बनाना चाहिए। क्योंकि, यह प्रदेश के सैकड़ों शिक्षितयुवक-युवतियों के भविष्य का सवाल है और सरकार की कथनी और करनी का भी।

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