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सारागांव के संत : बिसाहूदास महंत

बिसाहूदास महंत छत्तीसगढ़ के एक गांव ले निकल के मध्यपरदेस के मंतरी अउकांगरेस अध्यक्छ बनिस। जिनगीभर सेवा के रद्दा म चलिस। मिनीमाता परिवार अउ डॉ. खूबचंद बघेल परिवार संग बिसाहूदास महंत के घरोबा रिहिस। महंत परिवार ह छत्तीसगढ़ के अइसे परिवार ए जउन ह सेवा के बल म सरलग जन-जन के मान पाइस। जग ल अंजोर करिन।

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सारागांव के संत : बिसाहूदास महंत

सारागांव के संत : बिसाहूदास महंत

सारागांव ह पहली बिलासपुर जिला के जांजगीर तहसील म रिहिस। सारागांव ह नानकुन गांव ए । इहां बिसाहूदास महंत अउ डॉ. चरनदास महंत असन बड़े नेता जनमिन। आज तहसील ह जिला बन गे हे। जांजगीर-चांपा जिला छत्तीसगढ़ के नामी जिला कहाथे।
सारागांव के बड़े किसान कुंजराम अउ गायतरी देवी के बेटा बिसाहूदास के जनम एक अप्रैल 1924 म होइस। कबीर पंथी दाई-ददा के बेटा बिसाहूदास ह पढ़ई-लिखई म गजब हुसियार निकलिस। बिसाहूदास महंत के ददा कुंजराम ह अकाल-दुकाल म गांव छोड़ के आसाम कमाय-खाय बर चल दिस। मिनीमाता के नाना अघारी सतनामी अउ छत्तीसगढ़ के गांव-गांव के मनखे आसाम गिन।
बिसाहूदास तभो पढ़ई नइ छोडि़स। गांव म पराथमिक स्कूल के पढ़ई करे के बाद बिसाहूदास छटवीं पढ़े बर बिलासपुर चल दिस। महंतजी के बिहाव तभे होगे जब वोमन आठवीं कक्छा म पढ़त रिहिन। उंकर बिहाव बाराद्वार के तीर बेलहाडीह के किसान के बेटी जानकी बाई से होइस। डॉ. चरनदास महंत ह बिसाहूदास महंत अउ जानकी दाई के सपूत ए।
चौथी कक्छा से ही गुन्निक बिसाहूदास ल छात्रविरित्ति मिलत रिहिस। हाईस्कूल म महंतजी बिग्यान के गुन्निक विद्यारथी कहावय। बिसाहूदास अंगरेजी के बिसेस छात्र रिहिस। संग के पढ़इयामन वोला सब्दकोस काहंय। संगवारीमन ल कुछु पूछना राहय त बिसाहूदास ल पूछंय, सब्दकोस ल नइ देखंय। तेकरे सेती बिसाहूदास ल सब्दकोस केहे जाय। हाईस्कूल म बिसाहूदास जब पढय़ त वोकर से मेस के खरचा नइ ले जाय। एक तो गजब हुसियार, तेमा घर के हालत थोकन कमजोरहा। एकक खोली म चर-चरझन लइकामन राहंय अउ पढ़ंय।
महंतजी के संग पढ़इया रिहिन तरुन भादुड़ी। पक्का दोस्त बनिस। जउन ह जिनगीभर दोस्ती निभइस। बिसाहूदास मंतरी बनिस त भोपाल म तरुन भादुड़ी बड़े पत्रकार रहाय। गजब बछर बाद दूनों ‘मितान’ ल फेर एके सहर म रेहे के मौका लगिस। तरुन भादुड़ी ह अपन लेख म कई मौका म बिसाहूदास के विद्यारथी काल म होसियारी अउ अव्वल आय के बारे म लिखे हे। 1942 म हाईस्कूल पास करे के बाद बिसाहूदास महंत ह गांधीजी के भारत छोड़ो आंदोलन म सामिल होगे। विद्यारथी जिनगी म महंतजी खादी पहिरय। भारत छोड़ो आंदोलन म भाग लिस तेकर सेती अंगरेज सरकार ह वोकर छात्रविरित्ति ल बंद कर दिस।
हाईस्कूल के बाद घर गरीबी-अकाल के सेती पढ़ई आगू नइ बढ़तिस। फेर, बड़े भाई बहरतादास अंडग़े। वोहा बिसाहूदास ल पढ़े बर नागपुर भेज दिस। उहां मारिस कालेज म महंतजी पढि़स। उहों अच्छा पढ़ंता जान के महंतजी ल फेर छात्रविरित्ति मिलगे। महंतजी अपन बीमार बड़े भाई बहरतादास ल स्टाम्प पेपर म लिख के भेज दिस के भइया तोर बीमारी म जतका खरचा होय लगा दे। मोर हिस्सा के जमीन-जायजाद सब बेच के इलाज करवा। चि_ी पाके बड़े भाई बहरतादास रो डरिस। अइसन परेम रिहिस दूनों भाई म। बड़े भाई छोटे भाई ल बड़े मनखे बने के मंतर दंय। छोटे भाई सब चीज-बस ल भेंट करके भाई के जिनगी बचाय के संकल्प लय। दूनों के जोड़ी राम-लछमन सहीं रिहिस। कबीरपंथी, त्यागी परिवार के संस्कार के सेती नानपन म महंतजी सेवा के काम के महत्तम ल जान-समझ लिस।
महंतजी 1951 म नगर पालिका के उच्च माध्यमिक ***** म गुरुजी होगे। आजो उन ल बढिय़ा गुरुजी के रूप म सुरता करे जाथे। सारागांव म उही समे अच्छा पुस्ताकालय के स्थापना महंतजी करिस। महंतजी ह रात- दिन साहित्य के पुस्तक म बुड़े राहय। लिखे के अभ्यास बिसाहूदास उही समे से करिन। 1970 म बिसाहूदास महंत ह सारागांव म नवज्योति पुस्तकालय के स्थापना करिस। वोकर संग सबे संगवारीमन पढ़े-लिखे ल धरलिन।
1957 में महंतजी नवागढ़ विधानसभा म चुनाव लडक़े जीतिस। 1962 म फेर नवागढ़ से विधायक बनिस। 1972 म चांपा छेत्र से विधायक बनिन। 1972 म महंतजी ह परकासचंद सेठी मंतरीमंडल म उद्योग, श्रम अउ जनसक्ति मंतरी बनिस। अरजुनसिंह वो समे सिक्छा मंतरी रिहिस। बाद म अरजुनसिंह कांगरेस के विधायकदल के नेता बनिस। महंतजी कांगरेस के अध्यक्छ बनाय गिस। महंतजी जिनगीभर ईमानदारी से अपन पारटी के सेवा करिस। बड़े-बड़े पद म रहि के बिसाहूदास महंत ह गरीब, मजदूर, पिछड़ा, दलित अउ आदिवासीमन के हक के लड़ई लडि़स। 23 जुलाई 1978 के दिन महंतजी ए दुनिया ल छोड़ के चल दिस।