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LOCKDOWN लगते ही गुड़ाखू-गुटखा और सिगरेट जैसे नशीली चीजों की कालाबाजारी शुरू, एक बार फिर से आसमान छूने लगे दाम

सरकार ने बीते समय में लगे लॉकडाउन के दौरान थोक और चिल्लर विक्रेताओं पर पुलिस ने भी काफी शिकंजा कसने की कोशिश की हैं। लेकिन, इस बार फिर इन सामानों की कालाबाजारी शुरू हो गई है।  

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LOCKDOWN लगते ही गुड़ाखू-गुटखा और सिगरेट जैसे नशीली चीजों की कालाबाजारी शुरू, एक बार फिर से आसमान छूने लगे दाम

file photo

रायपुर. छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन लगते ही एक बार फिर गुटखा-गुड़ाखू, सिगरेट जैसे नशीली चीजों के दाम एक बार फिर आसमान छू रहे है।

सरकार ने बीते समय में लगे लॉकडाउन के दौरान थोक और चिल्लर विक्रेताओं पर पुलिस ने भी काफी शिकंजा कसने की कोशिश की हैं। लेकिन, इस बार फिर इन सामानों की कालाबाजारी शुरू हो गई है। इसकी वजह से लॉकडाउन के दो दिनों में ही गुटखा, पान मसाला और गुड़ाखू के दाम आसमान पर पहुंच गया है।

आलम यह है कि बाजार से ये सामान एक बार फिर से गायब होता नजर आ रहा है। इधर, छोटे दुकानादारों में इन सामानों को खरीदने के लिए हाय तौबा मची हुई है।

एक व्यापारी ने बताया, फिलहाल कीमतों में ज्यादा वृद्धि नहीं हुई है। लेकिन गुटखा-गुड़ाखू और सिगरेट जैसे उत्पादों के दाम रोज बढ़ रहे हैं और जो सामान आज मिल रहा है उसका कल मिलना तय नहीं है।

छोटे दुकानों से गुड़ाखू गायब
रायपुर मेें हुए लॉकडाउन की वजह से बाजार में गुड़ाखू को लेकर फिर से मारामारी शुरू हो गई है। बड़े दुकानों में तो गुड़ाखू मिल रहा है पर रिटेल काउंटर से यह गायब हो चुका है। बता दें कि लॉकडाउन के बाद 5 रुपए वाला गुड़ाखू 80 रुपए तक मिल रहे थे। अनलॉक के बाद इसकी कीमत कम होकर 10 रुपए तक हो गई थी। अब एक बार फिर से दामों में हुई वृद्धि ने लोगों की समस्या बढ़ा दी है।

पान मसाला-सिगरेट के भी दाम आसमान छू रहे रहे
जानकारी के मुताबिक सौ रूपए पुड़े में बिकने वाला गुटखा, डेढ़ सौ रुपए तक बिकने वाले पान मसालों और सिगरेट जैसे नशीली चीजों के दाम में भी वृद्धि हुई है।

रायपुर और बीरगांव में तिगुने दामों में बिक रहे
आपको बता दें कि रायपुर के गोलबाज़ार जैसे भीड़-भाड़ वाले इलाके में ही थोक विक्रेता इन सामानों को दोगुना से तिगुने दामों में बेच रहे हैं। गुटखा के आदतों में जकड़े लोग तीन गुने ज्यादा दामों में भी खरीदते हैं। जिसकी वजह से अवैध कारोबारी अपना क्षेत्र फैलाते जाते हैं।

एक बार फिर व्यापारियों की किस्मत खुल गई
गुटखा, सिगरेट व अन्य नशीली चीज़ों के दामों में तीन से चार गुना बढ़ोत्तरी कर व्यापारी जमकर मुनाफाखोरी कर रहे हैं। जिसके चलते व्यापारियों की किस्मत एक बार फिर खुल गई है। पिछली बार लगे लॉकडाउन के दौरान थोक और चिल्लर विक्रेताओं पर फिर से लॉकडाउन का फायदा उठाने में कोई कसर बाकि नहीं रखे है, इस बार थोक व चिल्लर विक्रेता सामान अपने दुकान से नहीं दे रहे बल्कि अलग-अलग जगह के पान ठेलों में पहुंचाकर माल दे रहे है और दामों में तीन से चार गुना वसूल रहे हैं।

प्रशासन का शिकंजा जरूरी
कुछ व्यापारी नकली माल भी बड़ी आसानी से खपा देते है। ऐसे लोगों पर अगर प्रशासन शख्ती करना चाहें तो ऐसे मुनाफाखोरों पर शिकंजा कसा जा सकता हैं और काफी मात्रा में माल भी ज़ब्त किया जा सकता हैं। फिलहाल, पुलिस प्रशासन मेन रोड पर कभी हेलमेट चेकिंग कभी कुछ चेकिंग के नाम पर चालानी कार्रवाई तो कर रही है पर इनकी नजर दुकानदारों पर नहीं पड़ रही है ना ही कोई कार्रवाई हो रही है। पुलिस प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है।

निर्माता कंपनियां बेच रही सही दामों में दुकानदार कर रहे मनमानी
भुक्तभोगी उपभोक्ताओं में अधिकांश दिहाड़ी मजदूर, सामान्य श्रमिक, सीमित वर्ग के लोग होते हैं। उनका कहना है कि 3 रु की तंबाकू 20 रु 5 का, 5 रु के गुड़ाखू को 30 से 40 रु और 5 का गुटका 15 रु में बिकने लगा है। श्रमिक वर्ग की गाढ़ी कमाई दुकानदारों के जेब में जा रही है। अब सवाल यह उठता है कि पांच गुना कीमतें किस किस के बीच बट रही है। बताया जाता है कि निर्माता कंपनियां अपने उत्पाद को एमआरपी रेट में ही दे रही है। किंतु दुकानदार अधिक कीमतों की राशि बैठ कर उपभोक्ताओं की जेब ढीली कर रहे हैं।

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