
नगर निकायों की नई ग्रेडिंग (फोटो सोर्स- पत्रिका)
CG News: प्रदेश के निकायों को ग्रेडिंग उनकी वार्षिक आय के आधार पर तय कर दी गई है। राज्य सरकार ने नियमों में बदलाव कर चार करोड़ से अधिक वार्षिक आय वाले निकायों को कक श्रेणी का दर्जा दिया है। इस तरह जिन नगर पालिका, नगर पंचायतें जिनकी वार्षिक आय दो करोड़ या उससे अधिक हैं परंतु 4 करोड़ से कम है उसे क श्रेणी में रखा गया है। संशोधित आदेश राजपत्र में प्रकाशित किया गया है। साथ ही श्रेणी भी तय की गई है।
आदेश के अनुसार, छत्तीसगढ़ नगरपालिका सेवाएं (वेतनमान एवं भत्ते) नियम, 1967 में संशोधन किया गया है। इस संशोधन के तहत नगर परिषदों एवं नगर पंचायतों के वर्गीकरण से संबंधित नियमों में बदलाव किया गया है, जिससे निकायों की श्रेणी निर्धारण की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित होगी।
राजपत्र में प्रकाशित निकायों की श्रेणी के अनुसार, कक श्रेणी में 12 निकायों को शामिल किए गए हैं। इसमें नगर पालिका परिषद दीपिका, नगर पालिका परिषद कवर्धा, नगर पालिका परिषद बलौदाबाजार, नगर पालिका परिषद कुम्हारी, नगर पालिका परिषद भाटापारा, नगर पालिका परिषद महासमुंद, नगर पालिका परिषद चांपा, नगर पालिका परिषद जामुल, नगर पालिका परिषद गोबरा-नवापारा, नगर पालिका परिषद सूरजपुर शामिल हैं। इसी तरह क श्रेणी में क में 23, ख 47 और ग में 98 निकाय शामिल किए गए हैं।
निकायों की श्रेणी के आय के आधार पर चार भागों में बांटा गया है। इसमें कक, क, ख और ग श्रेणी शामिल हैं। कक श्रेणी में चार करोड़ से अधिक वाले निकाय, क श्रेणी में दो करोड़ से अधिक लेकिन चार करोड़ से कम आय, ख श्रेणी में 90 लाख या उससे अधिक लेकिन दो करोड़ से कम और ग श्रेणी में 90 लाख से कम आय वाले नगर पंचायतें, नगर पालिकों को शामिल किया गया है।
शासन का उद्देश्य नगर परिषदों और नगर पंचायतों के प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ करना तथा कर्मचारियों की सेवाओं, वेतनमान व भत्तों से जुड़े प्रावधानों को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है। नगरीय निकायों के संचालन में पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढऩे की उम्मीद जताई जा रही है।
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यह संशोधन राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावशील होगा। यानी 21 जनवरी 2026 से यह नियम लागू माने जाएंगे।
इस संशोधन का प्रभाव नगर परिषदों, नगर पंचायतों और उनसे जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों पर पड़ेगा। नए वर्गीकरण के आधार पर वेतनमान, भत्तों और प्रशासनिक दायित्वों में भी बदलाव की संभावनाएं बनेंगी। इस फैसले को नगरीय प्रशासन व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में कदम माना जा रहा।
निकायों की श्रेणी तय होने के बाद अब शासन से मिलने चुंगीकर सहित अनुदान की राशि में भी बढोतरी होगी। साथ ही विकास कार्यों के लिए शासन द्वारा दी जाने वाली राशि अब श्रेणी के आधार पर बढ़कर मिलेगी।
Updated on:
06 Feb 2026 09:35 am
Published on:
06 Feb 2026 09:34 am
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