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ब्लैक लिस्टेड कंपनी के एमडी का दावा, देना पड़ रहा 7% कमीशन

पत्रिका के खुलासे से छत्तीसगढ़ में हडकंप, प्रतिपक्ष ने सीएम को चिट्ठी लिखकर की सीबीआई जांच की मांग रिश्वतकांड के बाद दवा निगम में कमीशनखोरी का खेल

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रायपुर . ब्लैकलिस्टेड होने के बावजूद छत्तीसगढ़ में दवा की सप्लाई करने वाली क्वालिटी फर्म कंपनी के प्रबंध निदेशक रमेश अरोड़ा ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि सारे भुगतान एजेंटों के माध्यम से होते है। हमें उसको भी पांच से सात फीसदी का कमीशन देना होता है।

ज्यादातर कंपनियों ने बाकायदे दवा निगम में अपना भुगतान प्राप्त करने के लिए एजेंटों की मदद लेते हैं यह एजेंट ही इनका सारा काम देखते हैं। प्रबंध निदेशक रमेश अरोड़ा ने कहा कि हम अपना कारोबार विदेश ले जा रहे हैं। उनका कहना था कि हमारे ढाई करोड़ के भुगतान पिछले कई महीनों से लंबित हैं। ब्लैकलिस्ट किए जाने को लेकर उन्होंने कहा कि सरकारी लैबोरेटरी की हालत बेहद खराब है। वहां योग्य लोगों का अभाव है।

उनका यह भी कहना था कि कई कई महीनो तक माल गोदाम में रखा रहता है उसकी डिलीवरी नहीं ली जाती हैं। रमेश अरोड़ा का कहना था कि बिना एजेंट के भुगतान संभव नहीं हो पाता, हमें पांच से सात प्रतिशत एजेंट को भुगतान करना पड़ता है ।

क्वालिटी फार्मास्युटिकल लिमिटेड को इसी सप्ताह मध्य प्रदेश सरकार ने टेंडर की शर्तों का पालन ने करने के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है, जिनकी पूरी सूची पत्रिका के पास है। इस कंपनी की दो दर्जन से ज्यादा दवाएं अलग अलग प्रदेशों में प्रतिबंधित हैं। क्वालिटी फार्मा को मध्य प्रदेश में ब्लैकलिस्ट होने की जानकारी पत्रिका से ही मिली है ।

एसीबी के पास दवा निगम के महाप्रबंधक वीरेंद्र जैन को लेकर कई शिकायतें आई थी जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई एसीबी एडीजी मुकेश गुप्ता ने बताया कि वीरेंद्र जैन से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आये हैं, जिनकी विवेचना की जा रही है। मुकेश गुप्ता से जब यह पूछा गया कि क्या इस मामले में अन्य की भी गिरफ्तारी की जा सकती है तो उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। लेकिन सूत्रों कि माने तो पूछताछ के आधार पर जो जानकारी मिली है, उसके आधार पर एसीबी कई अन्य के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकती है ।

नेता प्रतिपक्ष टी एस सिंहदेव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने कहा है कि दवा निगम द्वारा विभिन्न स्तरों पर आर्थिक भ्रष्टाचार के मामले सामने आये हैं, जिनमें ब्लैकलिस्टेड कंपनियों से वित्तीय वर्ष के समाप्ति के समय आनन-फानन में दवाइयों की खरीदी कमीशनखोरी व घूसखोरी के एक के बाद एक मामले सामने आने के बाद, मंत्रालय से लेकर पूरा स्वास्थ्य विभाग सवालों के घेरे में है। उनका कहना था कि दवाई खरीदी में लगातार हो रहे करोड़ों रुपए के घोटालों की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराई जाए, ताकि दवाई खरीदी में पारदर्शिता व विश्वसनीयता बरकरार रहे।

एसीबी ने मंगलवार की दोपहर आरोपी वीरेन्द्र जैन को लेकर दबिश दी। इस दौरान करीब 2 घंटे से भी अधिक समय तक फाइलों की छानबीन की गई। साथ ही सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक वी रामाराव का बयान भी लिया गया। उनकी उपस्थिति में सभी फाइलों की मूल प्रति जांच के लिए ली गई है।

एसीबी एसपी मनीष शर्मा ने बताया कि रिश्वत मामले से जुड़े हुए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। एसीबी ने रिमांड के दौरान आरोपी वीरेन्द्र से पूछा गया कि निविदा हासिल करने वाले कंपनियों से कितना कमीशन लिया जाता है। लेकिन, उसने गोलमोल जवाब देते हुए सारे आरोपों को खारिज कर दिया। आरोपी जीएम वीरेन्द्र जैन को 13 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। उसे जज जितेंद्र जैन की अदालत में पेश किया गया था। कोर्ट ने आरोपी को दोबारा 8 अप्रैल को पेश करने के निर्देश दिए हैं।

छत्तीसगढ़ स्टेट मेडिकल कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक वी. रामाराव ने कहा जब क्वालिटी फार्मा को केरल सरकार ने ब्लैकलिस्ट किया गया हमारी टेंडर प्रक्रिया उसके पहले शुरू हो गई थी। सलोन को केरल में दूसरी वजहों से ब्लैकलिस्ट किया गया है। कई बार ब्लैकलिस्टेड कंपनियों के खिलाफ देर से सूचनाएं मिलती हैं लेकिन जैसे ही सूचनाएं मिलती है, हम कारवाई करते हैं।

एंटी करप्शन ब्यूरो केएडीजी मुकेश गुप्ता ने बताया वीरेन्द्र जैन के खिलाफ कई शिकायतें आई थीं। उससे पूछताछ में कई जानकारियां मिली हैं जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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