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कुछ अलग अंदाज में मनाते हैं श्री राजीव लोचन मंदिर प्रांगण में होली का त्योहार

राजिम. पूरे प्रदेश में राजिम के होली का कुछ अलग ही आकर्षण रहता है। भगवान श्री राजीव लोचन से होली खेलने के लिए 50 हजार से अधिक लोगों की भीड़ रहती है जो आसपास के सैकड़ों गांव से आए होते हैं।

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कुछ अलग अंदाज में मनाते हैं श्री राजीव लोचन मंदिर प्रांगण में होली का त्योहार

कुछ अलग अंदाज में मनाते हैं श्री राजीव लोचन मंदिर प्रांगण में होली का त्योहार

राजिम. पूरे प्रदेश में राजिम के होली का कुछ अलग ही आकर्षण रहता है। भगवान श्री राजीव लोचन से होली खेलने के लिए 50 हजार से अधिक लोगों की भीड़ रहती है जो आसपास के सैकड़ों गांव से आए होते हैं। दोपहर 3 बजे से लेकर रात 8 बजे तक पूरे 5 घंटे मंदिर का विशाल प्रांगण सतरंगी गुलाल के बौछारों से सराबोर हो जाता है।
प्रांगण में नगाड़ों की थाप पर होलियारे न केवल नाचते-गाते, थिरकते हैं बल्कि हर पल गुलाल के बौछारों से माहौल रोमांचक होता है। मंदिर में भारी भीड़ के बीच राजनेता भी पहुंचते हैं क्योंकि लोगों के साथ उनकी मुलाकात इसी बहाने हो जाती है। राजिम के इस परंपरा में शुक्ल बंधु भी हमेशा पहुंचते रहे हैं।
पं. श्यामाचरण शुक्ल और उनके अनुज विद्याचरण शुक्ल के लिए राजिम की होली शुरू से प्रिय मानी जाती रही है। स्थानीय राजनेताओं में विधायक अमितेष शुक्ल, विधायक धनेन्द्र साहू, पूर्व मंत्री चंद्रशेखर साहू, चंदूलाल साहू, संतोष उपाध्याय से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधि भी विशेष रूप से दोपहर बाद मंदिर पहुंचते हैं। भीड़ में इन राजनेताओं के चेहरे भी रंग और गुलाल से सराबोर होने के कारण समझ में नही आता। यहां कोई छोटा, कोई बड़ा नही होता। हर कोई एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली के इस पावन पर्व को बहुत ही सौहाद्रपूर्ण वातावरण में उमंग और उत्साह के साथ मनाते हैं। रंगारंग माहौल में फाग गीत और नंगाड़े की धुन पर खूब आनंद आता है। युवक तो युवक, युवतियां भी रंगों के रंग में रंग जाती हैं।
बरसों पुरानी परंपरा चली आ रही
होली जलाने की यहां परंपरा बरसों पुरानी चली आ रही है। परंपरा के मुताबिक मंदिर के सर्वराकार ठाकुर शिव कुमार सिंह सबसे पहले महामाया मंदिर के पास होली जलाते हैं। दूसरे नंबर भुतेश्वर नाथ और उसके बाद भैरव बाबा मंदिर के पास जलाने के बाद शहर के तमाम जगहों पर रखी गई होली जलती है। पं. विजय शर्मा मंत्रोच्चारण करते हैं। ठाकुर ने बताया कि मंदिर का पट सुबह 4.30 बजे खुलेगा। भगवान का विशेष अभिषेक, पूजा-श्रृंगार होगा। श्री राजीव लोचन को कृष्ण के रूप में जामा पहनाया जाएगा।