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चौंक गए अफसर जब सामने आया टैक्स चोरी का अनोखा मामला, फुटेज खंगाला तो खुला राज

करोड़ों रुपए की जीएसटी चोरी के मामले में केंद्रीय जीएसटी इंटेलिजेंस के अफसरों ने टोल नाकों तक के फुटेज खंगाले और करोड़ों रुपए की टैक्स चोरी पकड़ी।

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Professional Tax: Notice given to 850 traders, deferment till March 31

रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में करोड़ों रुपए की जीएसटी चोरी के मामले में केंद्रीय जीएसटी इंटेलिजेंस के अफसरों ने टोल नाकों तक के फुटेज खंगाले और करोड़ों रुपए की टैक्स चोरी पकड़ी। दिलचस्प वाकया रहा कि बोगस बिलों में जिस गाड़ी नंबर से 20 से 25 टन लोहे का परिवहन दिखाया गया, वह ट्रक नहीं बल्कि मोटरसाइकिल निकला। गाड़ी नंबर की जांच-पड़ताल में यह बात सामने आई।

अफसरों ने बताया कि ओडि़शा से रायपुर राज्यमार्ग में जिस गाड़ी नंबर से संबंधित माल का परिवहन दर्शाया गया है, उसमें कई दोपहिया वाहन है। खरीदी-बिक्री से संबंधित बिल और गाड़ी नंबर की जब पड़ताल की गई तो वह गाड़ी दोपहिया निकली, जिसमें 20 से 25 टन का स्टील इधर से उधर कर दिया गया, जबकि व्यवहारिक दृष्टि से यह संभव नहीं है।

5 साल बाद एक बार फिर बोगस बिल से फर्जीवाड़ा
5 साल बाद एक बार फिर बोगस और फर्जी बिलों के रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। वैट के बाद अब जीएसटी में करोड़ों रुपए की टैक्स चोरी पकड़ी गई है, जिसमें राजधानी व प्रदेश के कई रसूखदार स्टील कारोबारियों के शामिल होने की आशंका जताई गई है। केंद्रीय जीएसटी एवं आसूचना महानिदेशालय की रायपुर शाखा की जांच में यह बात सामने आई है कि बड़े स्टील कारोबारी फर्जी और बोगस बिलों का सहारा लेकर जीएसटी विभागों ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) के नाम पर करोड़ों रुपए की टैक्स चोरी की।

सिर्फ कागजों में खरीदी-बिक्री
इस फर्जीवाड़ा में उत्पादों की आवाजाही नहीं हुई बल्कि सिर्फ कागजों में खरीदी-बिक्री दशाइ गई और जीएसटी रिटर्न में ब्यौरा दर्शाया गया।

1 फीसदी कमीशन पर बेचा फर्जी बिल
शहर के दलालों ने बड़ी कंपनियों को 1 फीसदी कमीशन के आधार पर जीएसटी रजिस्ट्रेशन युक्त बिलों की बिक्री की। उदाहरण के तौर पर दलालों ने गरीब-मजदूरों के आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आइडी, बिजली बिल लेकर जीएसटी में ऑनलाइन घर बैठे रजिस्ट्रेशन कराया और बिल बुक छपवाया। इस बिल बुक को बड़ी कंपनियों को बेचा गया। 100 करोड़ की खरीदी-बिक्री के बोगस बिल के पीछे दलाल ने 1 लाख रुपए का कमीशन बड़ी कंपनियों से लिया। इस बिल के बदले उद्योगपतियों ने केंद्रीय जीएसटी से आइटीसी का लाभ लिया।

राज्य जीएसटी को भी लगाया चूना
जानकारी के मुताबिक राज्य जीएसटी को भी इस मामले की जांच-पड़ताल करनी चाहिए। गिरोह ने राज्य सरकार को भी चूना लगाया है। इससे पहले वर्ष 2014-15 में वैट लागू रहने के दौरान विभाग में 400 करोड़ से अधिक का घोटाल उजागर हुआ था, जिसमें 7 कारोबारियों की गिरफ्तारी हुई थी। इस मामले में राज्य जीएसटी ने अभी एक्शन नहीं लिया है।

दस्तावेजों की पड़ताल में खुलेंगे कई राज
विभागीय सूत्रों के मुताबिक दस्तावेजों की जांच-पड़ताल जारी है। आशंका जताई जा रही है कि इसके तार कई बड़े कारोबारियों से जुड़े हैं, जिन्होंने टैक्स चोरी के लिए दलालों से बिलों को 1 फीसदी कमीशन रेट के हिसाब से खरीदा है। आने वाले दिनों में छापेमारी कार्यवाही भी जारी रहेगी।

क्या है आइटीसी?
इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) का मतलब माल की खरीदी के समय चुकाया गया कर, जिसे आउटपुट पर टैक्स देने के समय यानि किसी अन्य को माल बेचने के समय अपने इनपुट टैक्स से एडजस्ट कर सकते हैं, जो आपने माल खरीदते समय चुकाया है। जीएसटी विभागों में आइटीसी का नियम लागू है, जिसके जरिए कारोबारियों के बैंक खातों में रुपए क्रेडिट किए जाते हैं।