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प्रस्तावकों और समर्थकों को रोका, पूरन ने लगाई दौड़, लेकिन नहीं भर सके नामांकन

पूरन छाबरिया अमर अग्रवाल के खिलाफ निर्दलीय नामांकन करते दौड़ते हुए दोपहर करीब 2.50 बजे कलेक्ट्रेट के अंदर दाखिल हुए

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प्रस्तावकों और समर्थकों को रोका, पूरन ने लगाई दौड़, लेकिन नहीं भर सके नामांकन

बिलासपुर. भाजपा प्रत्याशी अमर अग्रवाल के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लडऩे के लिए ताल ठोक रहे पेंड्रा के भाजपा नेता पूरन छाबरिया ने जिला प्रशासन पर नामांकन भरने के दौरान बाधा पहुंचाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अफसरों ने उन्हें तो अंदर जाने दिया परंतु उनके प्रस्तावक और समर्थकों को बाहर ही रोक दिया और नामांकन नहीं कर पाए।

कलेक्ट्रेट परिसर में दोपहर तब अफरा-तफरी मच गई जब पेंड्रा निवासी भाजपा नेता पूरन छाबरिया फिर बिलासपुर विधानसभ्भा के भाजपा प्रत्याशी अमर अग्रवाल के खिलाफ निर्दलीय नामांकन करते दौड़ते हुए दोपहर करीब 2.50 बजे कलेक्ट्रेट के अंदर दाखिल हुए। इसके बाद भी वे नामांकन दाखिल नहीं कर सके और करीब आधे घंटे बाद बाहर निकल आए।

पूरन ने बताया कि गत 29 अक्टूबर को उन्हें कलेक्ट्रेट से गिरफ्तार किया गया था, गुरुवार की रात ही वे जेल से छूटे बैंक का खाता और दस्तावेजी प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद वे दोपहर करीब 2.50 बजे जब वे दौड़ते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे तो उन्हें तो अंदर जाने दिया गया परंतु उनके प्रस्तावक और समर्थकों को बाहर रोक लिया गया, दस्तावेज और नामांकन फार्म उनके समर्थकों के पास ही था जब वे नामांकन और दस्तावेज लेने के लिए बाहर आने लगे तो उन्हें रोक दिया गया।

उन्होंने कलेक्टर पी दयानंद के समक्ष अपनी बात रखकर उनसे निवेदन भी किया परंतु उन्होंने सीसीटीवी कैमरा लगे होने का हवाला देकर कुछ भी करने से मना कर दिया। जिससे वे नामांकन दाखिल नहीं कर सके।

प्रस्तावकों के पास थे दस्तावेज और फार्म
पूरन ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने मंत्री के दबाव में उन्हें नामांकन भरने से रोक दिया। उन्होंने इसकी शिकायत जिला निर्वाचन आयोग से की और इसकी प्रति राज्य निर्वाचन आयोग और राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग को भेजकर निर्वाचन प्रक्रिया को दूषित बताते हुए बिलासपुर विधानसभा के समस्त नामांकन को निरस्त करने की मांग की है। पूरन ने कहा कि वे इस मामले को लेकर कोर्ट जाएंगे।

बिलासपुर के कलक्टर पी दयानंद ने बताया कि मैं एेसा क्यों करूंगा, भाजपा नेता पूरन छाबरिया फार्म ही लेकर नहीं आए थे मैं अंदर बैठा था जानकारी मिलने पर बाहर आया। उनका आरोप गलत है। समय निर्धारित था परंतु पौने सात बजे तक नामांकन फार्म लिया गया है। वे एेसा क्यों कह रहे हैं पता नहीं। मुझसे उन्होंने कोई शिकायत नहीं की है यदि डिस्पैच में दिया होगा तो जानकारी नहीं है।