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चारों तरफ से एक जैसी दिखती है रायपुर की यह ऐतिहासिक इमारत, रानी विक्टोरिया के मुकुट के जैसा है आकार

CG History Information : राजधानी में आज भी मजबूती के साथ खड़ी कई ऐसी ऐतिहासिक इमारतें और स्मारक हैं, जो अपने गौरवशाली इतिहास को समेटे हुए हैं

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चारों तरफ से एक जैसी दिखती है रायपुर की यह ऐतिहासिक इमारत, रानी विक्टोरिया के मुकुट के जैसा है आकार

चारों तरफ से एक जैसी दिखती है रायपुर की यह ऐतिहासिक इमारत, रानी विक्टोरिया के मुकुट के जैसा है आकार

CG History Information : रायपुर . राजधानी में आज भी मजबूती के साथ खड़ी कई ऐसी ऐतिहासिक इमारतें और स्मारक हैं, जो अपने गौरवशाली इतिहास को समेटे हुए हैं। सालों गुजर गए लेकिन अभी भी न इनमें दरार आईं और न ही इनकी चमक कम हुई है।

CG History Information : घड़ी चौक पर स्थित एक ऐसी ही बिल्डिंग है (CG History building), जिसका निर्माण ब्रिटिशकाल (CG British history) में हुआ था। शहर का अजायबघर( Raipur Museum) जो वर्तमान में महाकौशल कलावीथिका के रूप में लोग जानते हैं। आज से 115 साल पहले ब्रिटिश काल में इसका उद्घाटन हुआ था।

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CG History Information : इतिहासकार आचार्य रमेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि राजनांदगांव( Rajnandgaon) के राजा महंत घासीदास ने अजायब घर बनवाया और इसका उद्घाटन ब्रिटिश काल में सन 1857 में हुआ। सन 1867 में जारी की गई नक्शे में इसका उल्लेख किया गया। अजायब घर का उपयोग अंग्रेज दुर्लभ चीजों का संग्रहित कर रखते थे। तीन साल पहले स्मार्ट सिटी ने इसे रीनोवेट किया है।

CG History Information : अजायबघर( Raipur Museum) का निर्माण इसलिए किया गया ताकि उसमें दुर्लभ चीजों को संजोकर रखा जा सके। वैसा किया भी गया और इस म्यूजियम में कला और संस्कृति से जुड़ी चीजों के अलावा पशु-पक्षी की अद्भुत कृतियों को यहां पर लाकर रखा गया, जिन्हें बाद में नया भवन बनने पर संस्कृति विभाग के महंत घासीदास संग्रहालय में रखा गया। इसमें संगमरमर से बनी कृति जिसमें अजायबघर का निर्माण कराने वाले महंत घासीदास का नाम अंकित है।

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रानी विक्टोरिया के मुकुट सा है आकार

CG History Information : इतिहासकार ने बताया, शहर में स्थित यह भवन जिसे लोग लगने वाली कला प्रदर्शनी को देखते हैं। उसे अजायब घर के रूप में तैयार किया गया था। इसे अष्टकोणीय में बनाया गया।

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CG History Information : बाहर से महारानी विक्टोरिया के मुकुट जैसा आकार दिया गया। किसी भी ओर से देखने पर यह बिल्डिंग एक जैसी दिखती है। भवन में कई दुर्लभ कृतियां थी। जिसे ब्रिटिशकाल की धरोहर के रूप में अब महंत घासीदास संग्रहालय में रखा गया है। इनमें तलवार, सिक्का, कपड़ा समेत अन्य समान मिले।