
चुनावी किस्से : 1991 के चुनाव में जब ब्राह्मण समाज ने एकजुट होकर बसपा को दिया वोट
रायपुर. बात 1991 के लोकसभा चुनाव की है। मैं जांजगीर-चांपा जिले से बहुजन समाज पार्टी का प्रत्याशी था। प्रचार के सिलसिले में सीपत के पास एक गांव में जाना हुआ। उस गांव में आधे लोग ब्राह्मण थे और शेष में यादव, केवट, सतनामी आदि जातियां।
पार्टी कार्यकर्ताओं ने सभा का मंच भी ब्राह्मण टोले में बना दिया था। मुझे वहां पहुंचने पर इसका पता चला। वहां लोगों ने मंच से घोषणा कर दी कि खुंटे जी ब्राह्मणवाद पर अपनी बात रखेंगें। यह भी बता दिया कि सभा में भी 40-50 ब्राह्मण बैठे हैं। मैं थोड़ा घबराया। फिर खुद को संभाल कर अपनी बात रखी। मैंने ब्रह्मा के मुख से ब्राह्मणों की उत्पत्ति वाली बात उठाई और कहा, यह ब्राह्मण औरतों का अपमान है। अगर उनके सामने कोई यह बात कह दे तो वे उसका सिर मूड़ देंगी।
इसके बाद मैं पत्थरों के बौछार की उम्मीद कर रहा था, लेकिन सभा से दूर घर के बाहर बैठी औरतों ने तालियां बजाना शुरू कर दिया। यह देखकर सभा में बैठे लोग भी तालियां बजाने लगे। सभा का माहौल बदल चुका था। गांव का माहौल भी बसपा के पक्ष में हो गया। चुनाव हुआ तो हार के बावजूद भी उस बूथ पर दो वोट ही दूसरे उम्मीदवार को मिले थे। शेष सभी ने जिसमें ब्राह्मण भी थे, बसपा को वोट दिया। मुझे लगता है कि पहली बार ब्राह्मण समाज ने एकजुट होकर बसपा को वोट किया था।
तीसरे नम्बर पर थी बसपा
छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों में बसपा का गहरा प्रभाव है। इसमें जांजगीर-चांपा जिला भी एक है। 1991 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान बसपा तीसरी ताकत के रूप में उभरी थी। यहां से बसपा को 47 हजार 144 वोट मिले थे, जो कि कुल वोटों का 12.38 फीसदी था। जबकि यहां से कुल 21 प्रत्याशी चुनावी मैदान में अपनी किस्मत अजमाने उतरे थे। यहां उस समय कुल मतदाताओं की संख्या 8 लाख 39 हजार 641 थी। जबकि 3 लाख 74 हजार 131 ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था। यहां कुल वोटिंग का प्रतिशत 44.56 फीसदी था।
(वरिष्ठ बसपा नेता टीआर खुंटे ने बताया 1991 के लोकसभा चुनाव में जांजगीर-चांपा का दिलचस्प वाकया)
Published on:
14 Sept 2018 06:22 pm
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