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चुनावों की तैयारी में जुटी कांग्रेस, छत्तीसगढ़ सहित तीन राज्यों से मांगा रोडमैप

राज्यों के चुनावों की तैयारी में जुटी कांग्रेस ने हिन्दी पट्टी के तीन राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ इकाई से चुनाव अभियान तैयारियों का रोड मैप मांगा है।

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rahul Gnadhi

रायपुर. चार राज्यों के चुनावों की तैयारी में जुटी कांग्रेस ने हिन्दी पट्टी के तीन राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ इकाई से चुनाव अभियान के दौरान पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की यात्राओं की तैयारियों और उनके दौरों की आवश्यकता का रोड मैप मांगा है। पार्टी ने तीनों इकाइयों से कहा है कि वे गांधी के दौरों का कार्यक्रम इस तरह बनाएं कि जहां भी पार्टी अध्यक्ष जाएं, उसके आसपास की कई विधानसभा सीटों को भी उसका लाभ मिले।

तीनों राज्यों की चुनावी तैयारियों में जुटी अखिल भारतीय कांग्रेस की टीम में शामिल सूत्रों के अनुसार तीनों राज्यों में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में चुनाव अभियान चलाया जाना है। चुनाव अभियान गुजरात की तर्ज पर होगा। गुजरात में राहुल गांधी के दौरों की योजना अलग तरीके से बनाई गई थी।

वे एक दिन में तीन से पांच विधानसभा क्षेत्रों को छू रहे थे और उनमें समाज के वंचित तबकों के साथ व्यापारिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, गृहणियों, युवाओं, आदिवासियों समेत लगभग हर तबके के साथ बातचीत कर रहे थे। गुजरात में बड़ी जनसभाओं के साथ नुक्कड़ सभाओं में भी राहुल के भाषण कराए गए, जिससे उनकी बात ज्यादा व्यापक दायरे में सुनी गई और उसके अपेक्षित परिणाम भी मिले। इसके अलावा उनके रोड शो भी कराए गए जिनमें युवाओं को सेल्फी के मौके भी दिए गए।

सूत्रों के अनुसार राजस्थान, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ की राजनीतिक परिस्थितियां गुजरात से बिल्कुल अलग हैं, फिर भी पार्टी ने तय किया है कि इन राज्यों में मोटे तौर पर दौरों का कार्यक्रम उसी तरह से बनाया जाना है जैसा गुजरात में बनाया गया था। उनमें स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए कई बदलाव भी किए जा सकते हैं। इसके सुझाव भी प्रदेश इकाइयों को देने हैं।

यद्यपि पार्टी अध्यक्ष तीनों राज्यों में अनौपचारिक तौर पर चुनाव प्रचार का आगाज कर चुके हैं, लेकिन औपचारिक शुरुआत अभी बाकी है और उसके लिए तीनों राज्यों के उन मंदिरों की सूची भी मांगी गई है जिनकी धार्मिक मान्यता का स्वरूप राष्ट्रीय हो। इसके अलावा राज्य इकाइयों से उन मुद्दों की सूची भी मांगी गई है, जिनको लेकर जनता में असंतोष हो। भाजपा के 2013 के चुनाव घोषणापत्रों के उन वादों विशेषकर क्षेत्र विशेष के लिए किए गए वादों की जमीनी स्थिति अर्थात वे पूरे हुए अथवा नहीं, इसकी जानकारी भी मांगी गई है।