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सरकारी अफसर- बड़े अधिकारियों के होने के बावजूद अपराध का गढ़ बना रायपुर

पिछले पांच वर्ष में हत्या, बलात्कार और धोखाधड़ी के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है

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सरकारी अफसर- बड़े अधिकारियों के होने के बावजूद अपराध का गढ़ बना रायपुर

राकेश टेम्भुरकर@रायपुर. राज्य सरकार से लेकर तमाम सुरक्षा एजेंसियां और फोर्स का मुख्यालय रायपुर में मौजूद है। इसके बाद भी रायपुर जिला पांच साल बाद भी अपराध के मामलों में नवम्बर वन पर है। यहां गैंगस्टर से लेकर माओवादी और आंतकी संगठन सक्रिय है और उनकी गतिविधियां भी लगातार बढ़ रही है। राज्य पुलिस और राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के आंकड़े बताते है कि 2013 में जब विधानसभा चुनाव हुए थे, उस साल में रायपुर जिले में सर्वाधिक 8 हजार 907 आपराधिक मामले दर्ज हुए थे।

2018 में जब विधानसभा चुनाव होना है, तो 30 जून की की स्थिति में रायपुर में सर्वाधिक 4 हजार 924 मामले दर्ज हो चुके हैं। जबकि रायपुर जिले से सरकार में दो मंत्री और तीन निगम-मंडल को प्रतिनिधित्व मिला हुआ है। गृह विभाग के आला अफसर भी रायपुर में ही तैनात रहते हैं।

पिछले पांच वर्ष में हत्या, बलात्कार और धोखाधड़ी के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए है कि वहां अधिवक्ताओं से मारपीट और गोली चलाने की घटना तक हो चुकी है। वहीं माओवादियों का शहरी नेटवर्क सिमी से लेकर इंडियन मुजाहिद्दीन के आंतकवादी भी अपना रैकेट चला रहा है। रायपुर उनके छिपने का सुरक्षित ठिकाना बन चुका है।

अपराध में छत्तीसगढ़ के टॉप 5 जिले





























2013
रायपुर

8907
दुर्ग6892
बिलासपुर

5147
जांजगीर

3470
रायगढ़3350




























2018
रायपुर4924
दुर्ग3655
बिलासपुर3467
जांजगीर1832
नंदगाव1783

रायपुर जिले के गंभीर अपराध








































अपराध20132018
चोरी-लूट और डकैती20421048
अपहरण428220
बलात्कार402191
धोखाधड़ी231229
छेड़छाड़205289
हत्या और प्रयास15262

दीपांशु काबरा, आइजी रायपुर रेंज

- बी.के.एस. रे, सेवानिवृत, अपर मुख्य सचिव

छत्तीसगढ़ के संस्कारधानी और मुख्यमंत्री डॉ़.रमन सिंह के गृहजिले राजनांदगांव के हालात भी बड़ी तेजी से बदल रहे है। २०१३ में इसकी गिनती अपराधों के शीर्ष पांच जिलों में नहीं होती थी। लेकिन, पिछले ५ वर्ष में वहां के हालात बड़ी तेजी के साथ बदले है। २०१८ में अब यह जिला टॉप ५ में शामिल हो चुका है। यहां माओवादी से लेकर गैंगस्टर तक सक्रिय हो गए है।

सरकारी सूचना तंत्र के फेल होते ही अपराधियों ने अपना मजबूत नेटवर्क तैयार कर चुके है। इस चक्रव्यूय को तोड़ पाने में अब तक पुलिस से लेकर तमाम सुरक्षा एंजेसियां पूरी तरह सफल नहीं हो सकी है। गौरतलब है कि रायपुर में केंद्रीय सुरक्षा बल , सीबीआइ, आइबी- एसआइबी से लेकर केंद्रीय डीजीसीआइ की खुफिया विंग तक काम कर रही है।