
रायपुर. कोरोना के बेकाबू रफ्तार के कारण प्रदेश के अधिकांश जिलों में Lockdown घोषित है। इसका असर मंदिरों पर भी देखा जा सकता है। चैत्र नवरात्र पर्व में प्राचीन महामाया का आंचल 11 हजार मनोकामना ज्योति से जगमगाता था, वह परिसर आज श्रद्धालुओं से सूना है।
कोरोना के भीषण संकट में केवल पुजारी सुबह-शाम माता का शृंगार-आरती कर रहे हैं। हालांकि लॉकडाउन की वजह से चैत्र नवरात्र में मातारानी के दर्शन न कर पाने वाले भक्त निराश हैं। मंदिर के पुजारी भक्तों को मातारानी के दर्शन कराने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं।
मंदिर के पुजारी भक्तों को यूट्यूब और वाट्सऐप ग्रुपों में वीडियो भेजकर मातारानी के दर्शन करा रहे हैं। पंडित मनोज शुक्ला बताते हैं कि श्रद्धालुओं को घर बैठे लाइव माता का अभिषेक और आरती का दर्शन कराने का प्रयास कर रहे हैं। बुधवार को द्वितीया तिथि पर ब्रह्मचारिणी स्वरूप का शृंगार किया गया। जिसे यूट्यूब और वाट्सऐप ग्रुपों में भेजा।
ऐसी स्थिति लगातार दूसरे साल चैत्र नवरात्र के समय बनी है, जब देवी मंदिरों में श्रद्धालु पूजा-अर्चना नहीं कर पा रहे हैं। घरों में ही पूजा चौकी सजाकर मातारानी को चुनरी, नारियल चढ़ाकर कर भोग लगा रहे हैं। घरों में माता का सबसे प्रिय जंवारा भी बोए हैं।
लॉकडाउन के कारण जरूर घर के सभी सदस्य दोनों समय आरती-पूजा में शामिल हो रहे हैं, लेकिन कोरोना की भयावहता ने सबको झकझोर रखा है। घरों में दुर्गा सप्तशती का पाठ और आरती-पूजा से भक्ति का माहौल है। घर-परिवार के सदस्य मातारानी से इस महामारी से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना कर रहे हैं।
बिजली की झालरों से मंदिर रोशन, पर भक्तों से सूने
देवी मंदिर शाम होते हुए रंग-बिरंगी बिजली की झालरों से जगमगा उठते हैं, लेकिन परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ है।
फूल बाजार बंद होने पूजन में भी दिक्कत
माता को हर दिन अलग-अलग पुष्पों का अर्पण करने की परंपरा रही है, परंतु फूल बाजार बंद होने के कारण पंचामृत अभिषेक कर हर दिन चुनरी चढ़ाकर पूजन संपन्न किया जा रहा है।
Published on:
15 Apr 2021 09:20 am
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