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सिव चरित ले सीखव

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सिव चरित ले सीखव

भगवान सिव के तीनठन आंखी सत्यम, सिवम अउ सुंदरम के परतीक ए। वोकरेे सेती सिवजी सत बोलइया, आन के हित करइया अउ मन ले सुग्घर होवइया ल बड़ परसंद करथे। कामी, करोधी अउ लोभी मनखे ल सिवजी ह अपन सत्यं सिवं सुंदरम के तीन आंखी ले भसम कर देथे। सिवजी के मुड़ म चंदा घलो हे। चंदा याने सीतलता के परतीक। जेन मनखे ह सांत नइ रहय सिवजी वोला कहुं जघा इस्थान नइ देवय। सिवजी ल पाना हे त सांत रहई बड़ जरूरी हे। सिवजी के मुड़ म गंगा सुरसुर-सुरसुर सरलग बहत रहिथे। गंगा पबरितता के परतीक ए।
जेन मनखे म पबरितता नइये अहू ल सिवजी परसंद नइ करय। सिवजी के घेंच म सांप के माला रहिथे। सांप मतलब समभाव। जेन मनखे ह जीव के परती समभाव रखथे वोहा सिवत्व ल पा सकत हे। बैर भाव रखइया मनखे ल सिवजी तीर घलो म भटके नइ देवय। सिवजी के घेंच म बिस रहिथे। जेन मनखे के बानी बिस असन कड़वा रहिथे सिवजी वोला देखाऊ नइ देवय। भगवान के कान म बिच्छी अउ बर्र लटकत रहिथे। बिच्छी अउ बर्र ले सिवजी संकेत देथे के अपमान ल सुनव। जेन अपन अपमान ल सुने अउ सहे नइ सकय सिव के सिवत्व ल वोहा पराप्त नइ कर सकय। मिरगाछाल ले भगवान सिव बताथे के वस्तु के सदुपयोग करव। जिनगी म जेन जिनिस मिले हे वोला फेंकव झन, भलुक सही उपयोग करव। मुंड के माला घलो भगवान सिव पहिरथे। मुंड माला के मतलब हे के हमर जिनगी सत नोहय, भलुक मिरित्यु सत ए। जिनगी के आखरी अवस्था ल ए मुंड माला ह दरसाथे। भसम लेपन ले सिवजी बताथे के हमर जिनगी माटी ले बने हे अउ माटी म ही मिल जाही। मरघट्टी म रहई ल सिवजी परसंद करथे। मरघट्टी के मतलब संतोस। जेन मनखे ल जेन जिनिस मिले हे उही म वोला संतोस धरे बर चाही। आखिर अंत म सब ल राख म ही मिले बर हे।
सिवजी कभु नसा करे के सीख नइ देहे हे। फेर, आज नसा करइयामन कहिथें जब सिव ह नसा करय त हम काबर नइ करबो। भगवान सिव के मूरति म गांजा, चिलम जइसे परान लेवइया जिनिस चढ़ाय के नियम हे। ऐकर मतलब ए नइये के सिवजी ह ए सब ल पीयइया ए, बल्कि ऐला चढ़ाय के मतलब हे के भगवान भोलोनाथ हमर नसा के बुराई ल आपमन दूरिहा करव। मनखे जबरदस्ती भगवान ल बदनाम करे बर पाछू परे रहिथे। सिवजी मनखे के कलियान करइया ए अउ वोकर भगती करइयामन सावन म बड़ पुन पाथें।