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सराबबंदी बर आगू आय ल परही

सब कुछ सरकार अउ कानून के भरोसा म संभव नइ हो सकय

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सराबबंदी बर आगू आय ल परही

नवा सरकार काहत हे कि सोच-बिचार के सराबबंदी लागू करे जाही। कोई भी ऐब ल अचानचकरित खतम नइ करे जा सकंय। ऐकर पहिली जुन्ना सरकार ह दू हजार ले कम अबादी वाले गांव म दारूभठ्ठीमन ल बंद करे रिहिस। फेर दारूबंदी के मामला म कोई खास फरक नइ परिस। फेर, सरकार ह ठेके पद्धति ल खतम करके खुदे सराब बेचे बर धर लिस। बिपक्छी पारटी ह ऐकर अब्बड़ बिरोध करिन। लोगनमन घलो सरकार के सराब बेचई ल बने नइ मानिंन। जुन्ना सरकार के सोच रिहिस के अचानक चुकता दारूबंदी करे ले राज के आरथिक ढांचा चरमरा जही अउ पियक्कड़मन घला धड़मड़ा जहीं।
सब कुछ सरकार अउ कानून के भरोसा म संभव नइ हो सकय। जनता ल घलो दू कदम आगू आय बर चाही। वइसे जनता म घलो खास करके माइलोगनमन म सराबबंदी ल लेके बहुत जागरुकता आय हे। गांव-गांव म दारू के धंधा अउ दरूहामन के मनोबल गिराय बर भारत माता वाहिनी के गठन होय हे। फेर न दारू बिकई कम होवत हे न दारू पियई। अब नवा सरकार ल हब ले कुछु करे बर परही। 'नइ रिही बांस, नइ बाजही बांसरीÓ के रद्दा अपनाय बर चाही।