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छत्तीसगढ़ के गांधी पंडित सुंदरलाल

सुरता म

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छत्तीसगढ़ के गांधी पंडित सुंदरलाल

छत्तीसगढ़ के गांधी पंडित सुंदरलाल

छ त्तीसगढ़ के गौरवए माटीपुत्र, कवि, लेखक, स्वतंत्रता संगराम सेनानी, समाज सुधारक, इतिहासकार, चित्रकार के रूप म अपन पहचान बनइया, जेकर जम्मो जीवन यापन अपन भुइंया अउ अपनभासा के सेवा-जतन बर निछावर हो गे। अइसन गुनिक रिहिन पंडित सुंदरलाल सरमा ह। जेला जम्मो देसभर म छत्तीसगढ़ के गांधी या गांधीजी के गुरु के नाव ले जानथे मानथे।
जीवन परिचय : सरमाजी के जनम 21 दिसम्बर 1938 के पंडित जयलाल तिवारी कांकेर रियासत के विधि सलाहकार अउ महतारी देवमती देवी के घर राजिम के तीर म बसे महानदी के कोरा म गांव चमसुर म बड़े जागीरदार के घर होइस। इंकर पहली पढ़ई पराथमिक ***** म होहिस। फेर बाकी पढ़ई ल घरे म करिन अउ संस्करीत, बंगला. उडिय़ा, गुजराती, मराठी, उरदू, अंगरेजी के घलो गियान पाइन। ददा संगीत के जानकार सौकिनहा रहय। घर म अब्बड़ पत्रिका आय। केसरी, मराठा जेकर ले वोकर सोचे-बिचारे के छमता बाढ़े लागिस।
लेखन काम : सरमाजी हिन्दी भासा के संगे-संग छत्तीसगढ़ी म घलो लिखे। जवनहापन ले संस्कारी परिवार के छाप लेखन कौसल ल दिखे लगिस। कविता, लेख, नाटक के साथ सामाजिक कुरीतिमन म मिटाय बर अउ सिक्छा के परचार-परसार बर अब्बड़ जोर देवत कुल 18ठन ग्रंथ के रचना करेव। जेमे छत्तीसगढ़ी दानलीला सबले जादा नामी हे। छत्तीसगढ़ी म दुलरुवा पत्रिका अउ हिन्दी म किरिस्न जन्मस्थान पत्रिका ल जेल म रहिके 18 पेज के हस्तलिखित रूप म निकाले के भाग हे।
परमुख रचना : खंडकाव्य- छत्तीसगढ़ी दानलीला, राजिम प्रेमपीयुस, काव्यमृवासिनी, करुना पच्चीसी, एडवर्ड राज्याभिसेक, विक्टोरिया बियोग, कंस वध। नाटक-सीता परिनय, पारवती परिनय, प्रहलाद चरित्र, ध्रुव,आख्यान, विक्रम ससिकला। उपन्यास- सिरी किरिस्न जन्म आख्यान, सच्चा सरदार अप्रकाशित संग्रह- राजिमस्त्रोत्रम महात्म्य स्फुट प संगरह, स्वीकरीति भजन संगरह, रघुराज भजन संगरह, परलाप पदावली, ब्राम्हनो गीतावली, छत्तीसगढ़ी रामायन।
परमुख आंदोलन : सरकार के भरोसा म घाते अकन आंदोलन छत्तीसगढ़ म चलिन। अपन सामाजिक चेतना के स्वर ल घरों-घर लेजे बर अब्बड़ बुता करे हवय। स्वदेसी आंदोलन, आदिवासी आंदोलन, रास्ट्रीय किसान आंदोलन, मद निसेध आंदोलन, जंगल सत्यागरह, कंडेल नहर सत्यागरह, गौ वध विरोध, मंदिर म हरिजन परवेस, असहयोग आंदोलनए राषटीय स्कूलए सतनामी आश्रम जैसे अब्बड़ आंदोलन अउ लोक हितकारी के काम ल आघु रही के पूरा करे के जिम्मा उठाएव अउ पूरा करेव।
छग के सपना देखइया : आप ल अलग छत्तीसगढ़ राज के पहिली सपना देखइयाा अउ संकल्पनाकार कहे जाथे। अपन मातृभूमि के जिनगीभर सेवा करत अंचल म एक प्रेरना के खूंटा सही दमदम ले खड़े रहिके छत्तीसगढ़ के जम्मो स्वतंत्रता आंदोलन म अगवा बनके रेहेंव। छत्तीसगढ़ के भोला-भला जनतामन के किस्मत म सिजोय बर अपन जीवन ल खपा देव। आपके काम के परताप के सेती आज छत्तीसगढ़ राज ल बने 20 बसर होगे। अब कहूं ऊपर ले अपन राज के सपना पूरा होय देख सुंदरलाल सरमाजी जरूर अब्बड़ खुस होत होही।
गांधीजी अउ सुंदरलाल : महात्मा गांधीजी ल सबले पहिली छत्तीसगढ़ लाय के जुम्मेदारी सरमाजी के रिहिन। कलकत्ता ले गान्धीजी ल बलाय गिन अउ 20-21 दिसम्बर 1920 के आके इहा के आन्दोलन के हालचाल जानिस। दुसरैया पहित फेर आइस त 22.28 नवम्बर 1933 के हरिजन उतधार कारयरमम म पहुचे रिहिन। गांधीजी देसभर म हरिजन कलियान के तहत इंचों आइस वोकर आय के पहिली सुंदरलाल सरमाजी दुवारा हरिजन उतधार के काम शुरू होगे रिहिस। तब गांधीजी अब्बड़ खुस होके सरमाजी ल अपन गुरु मानिस।
अछूत उद्धार : काकीनाडा सम्मेलन ल आय के बाद सरमा जी अछूत उत्थान कारयकरम सुरू करिन। समाज म समानता लाय बर उंकर घर भोजन करिन, जनेऊ पहिराइन। बामहनमन अब्बड़ विरोध करिन। फेर, पंडितजी अपन काम ल अटल होके करे बर दांव लगा दिस।