
दू सौ बछर जुन्ना हे रायपुर सहर के टूरी हटरी ह
रायपुर सहर के पुरानी बस्ती म टूरी हटरी नाव के जगा दू सौ बछर पहिली लेे बने हवै। ऐकर टूरी हटरी नाव ऐकर सेती हे कि इहां माइलोगनमन के जरूरी सामान बेचे के ठिहा रिहिस। आगू के जमाना म इहां सिरिफ माइलोगनमन के सामान भर मिलय। अब तो इहां सबो सामान मिलथे। फेर, अभी घलो माइलोगनमन के जरूरत के सामान जादा मिलथे।
हमर पुरखामन कतेक सोच बिचार के इंतजाम करंय। तेकर टूरी हटरी ह गजब के नमूना हरे। महिला ससक्तीकरन के बात जउन ल आज अपनाये जावत हे, तेला वो जमाना म हमर सियानमन पहिली ले सोच के टूरी हटरी के स्थापना करे रिहिन हें।
टूरी हटरी ह पुरानी बस्ती के बीचो-बीच म बने हे। ऐहा चारों डहर के गली ले जुरे हवय। याने चारोंमुड़ा के माइलोगनमन ह अपन-अपन घर ले निकल के अराम से टूरी हटरी पहुंच जावत रिहिन। वो समे म रायपुर ह छोटकुन बस्ती रिहिस। पुरानी बस्ती के तीरे-तीर म सहर के सबे मोहल्ला ह बसे रिहिस। लीली चउंक, बुढ़ेस्वर मंदिर, महामाया मंदिर, सीतला मंदिर के आस-पास आने सामान मिलय। फेर, महिलामन के सामान जइसे टिकली, फिंदरी, फिता, सिंदूर, गहना-गूठा, खिनवा, खोपा, चूरी ह टूरी हटरी म मिलय।
बर-पीपर के छांव ह बजार ल जुड़ राखथे
टूरी हटरी के तीर म जुन्ना जगन्नाथ मंदिर हे। थोरकुन दूरिहा म जैतूसाव मठ हे। वो जमाना के पोठ दाऊमन के बड़े-बड़े मकान अउ हवेली इही बस्ती म रिहिस। मंदिर, देवाला टूरी हटरी के तीरे-तार रिहिस। टूरी हटरी म हाट, बजार जइसन चबूतरा बने हे। बीच म बर-पीपर के छइंहा बर रूख हे। जउन बजार ल ठंडा राखथे। वो जगा के खासियत हे कि गरमी के दिन म घलो जादा ताप नइ रहय। तीरे-तीरे म वोजमाना के दाऊमन के सुग्घर नक्कासीदार मकान बने हे। कईठन मकान मन हर अतेक मजबूत हे कि आज तक अपन इतिहास के झलक ल देखावत मजबूती ले खड़े हे। पुरानी बस्ती ह रायपुर के सब लेे ऊंच जगा म बसे हे। टूरी हटरी ह सबले ऊंच जगा म बने हे।
Published on:
19 Jul 2021 03:44 pm
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