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‘पर भरोसा, तीन परोसा’ ह जादा दिन नइ चलय!

का- कहिबे

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‘पर भरोसा, तीन परोसा’ ह जादा दिन नइ चलय!

‘पर भरोसा, तीन परोसा’ ह जादा दिन नइ चलय!

बबा, ये ‘पर भरोसा, तीन परोसा’ का होथे?
बेटा, ऐहा हमर छत्तीसगढ़ के एकठिन हाना ए। ऐला अइसन लोगनमन बर कहे जाथे जउनमन दूसर के ताकत म गरजथें। दूसर के मेहनत म मजा उड़ाथें। दूसर कमाथें अउ ऐमन डटके खाथें।
बबा, थोकिन फोरिया के बता ना गा। मोला तो कुछु समझ म नइ आइस। पेपर म पढ़े रहेंव के हमर परदेस के मुखिया ह घलो काहत रिहिस के ‘पर भरोसा, तीन परोसा’, अब नइ चलय।
बेटा, लागथे तोला सिद्धो-सिद्धो बताय बर परही। तभे तोर समझ म आही। त ऐला अइसन जान- तेहा अभु कुछु नइ कमावत हस, फेर तीन पइत भरपेट खावत हस। ददा-बबा के कमई म मजा उड़ावत हस। इही ल कहिथे- पर के भरोसा म तीन परोसा खवई। अउ, कुछु काहंव या फेर समझ गेस?
बबा, सब समझ गेंव। मुख्यमंतरी ह अपन ले पहिली परदेस म सासन करइया पारटी वालेमन बर ‘पर भरोसा, तीन परोसा’ काबर कहे रिहिस तेन ला। फेर, मोला जउन... कहेस, बने नइ लागिस।
बेटा, सच बात ह अब्बड़ करू होथे जी। सच बात ल सुन के जादाझन लोगनमन तिलमिला जथें। जइसे मुख्यमंतरी के बात ल सुनके बिपक्छी पारटी के कतकोनझन नेतामन तिलमिला गिन होंही। फेर, तंय ह नइ समझत रेहेस तेकर सेती समझाय बर तोरेच बात कहे बर लागिस। ददा-बबा के ऊपर जादा आसरित होवई ह तको बने नोहय जी। किस्सा-कहिनी, पुरानमन म तको ‘पर भरोसा, तीन परोसा’ के कतकोन उदाहरन मिल जही। अंगरेजमन के फूट डालव अउ राज करव के नीति ह तको ‘पर भरोसा, तीन परोसा’ जइसे हे। फेर, कभु-कभु पर के जादा भरोसा करई ह उल्टा घलो पर जथे। जइसे के ‘दुरयोधन।’ दुरयोधन ह तो पर भरोसा म ‘महाभारत’ करा के कुल के नास करा दिस।
बबा, त का हमर परदेस म सरलग पंदरा बछर सासन चलइयामन तको ‘पर भरोसा’ के सेती अपन पारटी के बारा बजवा डरिन? का ‘जनता जनारदन’ ह वोकरमन के चाल/खेल ल समझ के वोकर नेतामन ल हरवादिन?
बेटा, सच बात ह नइ छुप सकय। कभु न कभु आगू म आबेच करथे। देखथस ना, रात ह कतकोन बिरबिट करिया (अंधियारी) होथे, फेर पहाथे तहां ले उजियारा हो जथे। सुरूज देवता ल करिया बादर ल थोकिन समे बर ढक लेथे, फेर सुरूज देवता ह फेर आगू आ जथे। वोइसने सच ल कतकोन छुपा, एक न एक दिन वोहा आगू आबेच करथे। चाहे बात राजनीति के हो या फेर देस-समाज, घर-परिवार, करम-धरम के। तभो तो कहिथें- ‘सत्यमेव जयते।’
जब सच ह सदा जीतही, अउ झूठ-लबारी ल हरदफे हारही, तभो ले लोगनमन अपन सुवारथ, लालच म अनीति, अनियाय, अतिचार, अधरम के रद्दा म रेंगथें। आंखी रहिके अंधरा बन जथें, त अउ का-कहिबे।