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छत्तीसगढ़ म सबे समाज के पतरिका अब आगू आवत हे

थरहा वाला धान जादा कूत देथे। कूत माने उत्पादन। उपज अच्छा होथे। ‘आखर थरहा’ माने अक्छर के ठीक ढंग से खेती। बोता म कतको धान के बीजा नइ जामय। थरहा म हर पौधा जामथे अउ सोनहा धान बरसाथे।

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छत्तीसगढ़ म सबे समाज के पतरिका अब आगू आवत हे

छत्तीसगढ़ म सबे समाज के पतरिका अब आगू आवत हे

समाजमन के जागरन बर सियानमन सदा संसो करत रहिथें। छत्तीसगढ़ में कंगला मांझी ह साठ समाज ल जोरिस अउ मांझी सरकार बनइस। वोकर सैनिक संगठन म सबो पिछड़ा, दलित आदिवासी समाज के मन मिलथें। मांझीधाम बघमार म 6 दिसम्बर से 10 दिसम्बर तक सुरता म सैनिक सम्मेलन होथे। ओमे अलग-अलग जात के सैनिक आथें। मांझीजी जादा पढ़े-लिखे नइ रिहिस, फेर जागरन बर एकठन किताब छपइस ‘भारत भूमिका’। ऐमा गीत, भजन, जातमन के रीत-रिवाज सबला लिखिस। बिहाव, मरनी, मेला, मड़ई सबला। ओइसने डॉ. खूबचंद बघेल ह ऊंच-नीच नाटक लिखके बतइस के कोनो ऊंच अउ नीच नइ होवय। मनखे-मनखे एक समान। गुरु बाबा घासीदासजी के संदेस हे-
मनखे-मनखे ल मान
सग्ग भाई के समान।
सब जात के महापुरुसमन एकता, समता के बात करे हे । छत्तीसगढ़ म अब जात के संगठन ह लिखइया-पढ़इयामन ल अपन संग जोर के अच्छा काम करत हें। अलग-अलग समाज के सालाना पतरिका या महिनवारी पतरिका निकलथे। सतनामी समाज, बाम्हन समाज के मासिक पतरिका बहुत बछर से निकलत हे। विप्र संदेस अउ सतनाम संदेस पतरिका के बहुत महत्तम हे। हर समाज के सियानमन नवा व जवननहा लइकामन ल आघू आय के रद्दा देथे अउ बताथे।
डॉ. खूबचंद बघेल ह अजादी के लड़ई लडि़स, फेर छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान के लड़ई बर लिखइय- पढ़इया सोच-बिचार वालामन ल जोर के बड़े आंदोलन करिस। छत्तीसगढ़ मातरीसंघ संघ बनइस। थकगे त किहिस- नवा पीढ़ी के लइकामन मोर सियनहा हाथ से जागरन के मसाल ल लेके आगू बढ़व।
ए बात ल सबो समाज के सियानमन कहिथें। घर के सियानमन इही सोचथें कि लइकामन घरे के सब कारबार ल संभालंय। इही सोच के सेती हर समाज म पतरिका के छपई होथे। साहू समाज, देवांगन समाज, आदिवासी समाज, छत्रिय समाज, ताम्रकार समाज, निसाद समाज, लोधी समाज, कुरमी समाज, बाम्हन समाज के पतरिका निकलथे। सबे समाज के पतरिका अब सामने आवत हे।
समाज के पतरिकामन म समाज के लेखकमन के रचना छपथे। कभुकभार समाज के बाहर के लेखकमन के लेख घलो छपथे। ऐहा परंपरा से चले आवत हे। के. आर. साह ह ‘आदिवासी सत्ता पतरिका’ निकालथे, जेमा आदिवासीमन के इतिहास, पुराना राज-काज, परपंरा, आज के समे म हालत, राजनीतिक के दांव-पेंच के बारे म लेख रहिथे।
समाज के संगठन के परदेस के पतरिका निकलथे अउ देस के पतरिका घलो निकलथे। कुरमी छत्रिय जागरन पतरिका हिन्दी म सत्तर -अस्सी बछर से निकलत हें। छत्तीसगढ़ के लिखइया-पढ़इयामन छत्तीसगढ़ के सामाजिक संगठन के पतरिका ल छत्तीसगढ़ी भासा म अब निकाले के सफल कोसिस करत हें।
छत्तीसगढ़ मनवा कुरमी छत्रिय समाज ह दू बछर से नवा पतरिका निकालत हे। ऐकर नाव बहुत अच्छा रखे गे हे। नाव हे ‘आखर थरहा।’ कुरमी समाज ह किसानी के काम बर जाने जाथे। सबो जात ह आज खेती करत हे। अइसन समे म छत्तीसगढ़ कुरमी छत्रिय समाज ह पतरिका के नाव चुनिस ‘आखर थरहा।’ ए नाव ह सबला गजब जमिस। मुख्यमंतरी भूपेस बघेल ल नाव अच्छा लागिस। थरहा खेती के जरूरी अंग ए। थरहा देके बोए धान के उत्पादन जादा होथे।
आखर थरहा माने अक्छर के ठीक ढंग से खेती। ऐकरे सेती ए नाव ल पसंद करे गिस। खेती से जुड़े जात के संगठन के पतरिका के नाव म ही सब विसेसता हे। छत्तीसगढ़ के परंपरा, अखरा के जगन्नाथ मंदिर, चंदखुरी के माता कौसल्या मंदिर, सादगी के बिहाव करे के बात, मरिया म भोज के सादगी, बिहाव म आडंबर के विरोध, मिलजुल के कइसे रहना जरूरी हे, कीटनासक से खेती ल का नुकसान हे। सराब ह समाज ल कइसे बरबाद करत हे। सियानमन समाज बर परिवार बर कतेक जरूरी हे। नवा पीढ़ी के का धरम हे, ए सब बात ऊपर लेख हें।