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इस शहर में शवों को दफनाने नहीं मिल रही जगह, जहां कर रहे गड्ढा निकल रही हड्डियां

Chhattisgarh Ajab Gajab : खुले में पड़ी लाशें (Dead Bodies) सड़ने लगी हैं । इनसे बदबू आ रही है। इनकी (Raipur city) न शिनाख्त नहीं हो पा रही है और न ही अंतिम संस्कार।

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Chhattisgarh ajab gajab

इस शहर में शवों को दफनाने नहीं मिल रही जगह, जहां कर रहे गड्ढा निकल रही हड्डियां

रायपुर. जहां भी गड्ढा कर रहे हैं वहां हड्डियां निकल रही है। अब तो (Chhattisgarh ajab gajab) नौबत ऐसी आ गई है कि लाशों का पोस्टमार्टम होने के बाद उसे मर्च्यूरी में रखने को मजबूर हो गए हैं। ऐसी स्थिति में खुले में पड़ी लाशें (Dead Bodies) सड़ने लगी हैं । इनसे बदबू आ रही है। इनकी (Raipur city) न शिनाख्त नहीं हो पा रही है और न ही अंतिम संस्कार।

शहर के लावारिश लाशों के अंतिम संस्कार के लिए जोरा श्मशान घाट में जगह ही नहीं है। अब जहां भी गड्ढा करते हैं, हड्डियां निकल रही हैं। इस वजह से संस्था ने अंतिम संस्कार बंद करने की मन बना लिया है। ऐसे में लावारिश लाश पोस्टमार्टम के बाद मर्च्यूरी में पड़ी रहेंगी।

यहां छह फ्रीजर हैं, जो शव पहुंचने के लिए पर्याप्त नही हैं। खुले में पड़ी लाशें सडऩे लगी हैं । इनसे बदबू आ रही है। लावारिश लाशों का अंतिम संस्कार करने वाले मोक्ष श्रद्धांजलि सेवा संस्थान के संचालक सैय्यद जमीर अली ने बताया, नई जगह के लिए शासन से कहा गया था। इसके बाद मंदिर हसौद में सरकारी जमीन देने का आश्वासन मिला। स्वीकृति मिलने के बाद भी मंदिर हसौद के आरआई और पटवारी जमीन का नाप-जोख नहीं कर रहे। कलक्टर कह रहे, जल्द ही जमीन दिलवाएंगे।

मोक्ष संस्था के संचालक जमीर अली का कहना है कि शासकीय जमीन की आवश्यकता अंतिम संस्कार के लिए जरुरी होती है। मोक्ष संस्था ने अब तक 400 से ज्यादा शवों को ससम्मान अंतिम संस्कार किया है। लगातार तीन साल से संस्था यह काम कर रही है। जिला प्रशासन चहे तो खाली जमीन आवटित कर सकती है।


सैय्यद जमीर अली, संचालक, मोक्ष श्रद्धांजलि सेवा संस्थान

एस. भारतीदासन, कलक्टर, रायपुर

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