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छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव: महज 9 प्रतिशत टिकट ही महिलाओं को दिए जाते हैं

राजनीति में महिलाओं को 33 फीसदी भागीदारी देने की बात तो हर राजनीतिक दल के लोग करते आए हैं, लेकिन सच्चाई अब भी इसके विपरीत है।

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Chhattisgarh Assembly Elections

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव: महज 9 प्रतिशत टिकट ही महिलाओं को दिए जाते हैं

राजकुमार सोनी/रायपुर. राजनीति में महिलाओं को 33 फीसदी भागीदारी देने की बात तो हर राजनीतिक दल के लोग करते आए हैं, लेकिन सच्चाई अब भी इसके विपरीत है। छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हुए 18 साल हो चुके हैं और इन सालों में विधानसभा के तीन चुनावों में भाजपा और कांग्रेस जैसे प्रमुख राजनीतिक दल ने महिलाओं को महज नौ से तेरह फीसद टिकट दिए हैं। वर्ष 2018 में एक बार फिर चुनावी रणभेरी बजनी है, ऐसे में दोनों दलों से जुड़ी महिलाओं को उम्मीद है कि उन्हें भरपूर तव्वजो मिलेगी।

वैसे हर चुनाव में करीब 70 फीसदी महिलाएं अपने मताधिकार का प्रयोग करती है और कम हैरत की बात नहीं है कि मताधिकार में आधी आबादी ग्रामीण इलाकों से ही आती है। विशेषकर उन इलाकों से जो पिछड़े कहलाते हैं या माओवाद से प्रभावित। ऐसा भी नहीं है कि शहर में रहने वाली महिला मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं करती, फिर यह सत्य है कि मतदान के मामले में ग्रामीण महिलाओं का रुझान अपेक्षाकृत थोड़ा अधिक है।

तीसरी बार भी रेणु
इस बार 14 महिलाओं को मैदान में उतारा, कोटा से रेणु जोगी तीसरी बार विजयी हुई। डौंडीलोहारा अनिला भेडिय़ा, दंतेवाड़ा देवती कर्मा और मोहला-मानपुर तेजकुंवर नेताम ने चुनाव जीता, जबकि भाजपा की सुनीति राठिया ने लैलूंगा, केराबाई मनहर ने सारंगढ़, रुपकुमारी चौधरी ने बसना, रमशीला साहू ने दुर्ग ग्रामीण, सरोजनी बंजारे ने डोंगरगढ़ और चंपादेवी पावले ने भरतपुर सोनहत से चुनाव जीता।

तीसरी बार भी रेणु
इस बार 14 महिलाओं को मैदान में उतारा, कोटा से रेणु जोगी तीसरी बार विजयी हुई। डौंडीलोहारा अनिला भेडिय़ा, दंतेवाड़ा देवती कर्मा और मोहला-मानपुर तेजकुंवर नेताम ने चुनाव जीता, जबकि भाजपा की सुनीति राठिया ने लैलूंगा, केराबाई मनहर ने सारंगढ़, रुपकुमारी चौधरी ने बसना, रमशीला साहू ने दुर्ग ग्रामीण, सरोजनी बंजारे ने डोंगरगढ़ और चंपादेवी पावले ने भरतपुर सोनहत से चुनाव जीता।

महिला कांग्रेस अध्यक्ष फूलोदेवी नेताम ने कहा कि जीत-हार बहुत अलग मसला है, लेकिन हमारे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का स्वभाव मोदी जैसा नहीं है। मोदी की पार्टी में न तो महिलाओं को सम्मान दिया जाता है और न ही तरजीह दी जाती है। महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कांग्रेस पार्टी की तरफ से ही उठी थी। हम उम्मीद करते हैं कि महिलाओं को पार्टी सम्मानजनक अवसर अवश्य प्रदान करेगी।

महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष पूजा विधानी ने कहा कि हमारी पार्टी में महिलाओं का सम्मान न केवल संगठन में है, बल्कि फील्ड में भी है। जो महिलाएं बेहतर कार्य करती है, पार्टी उन्हें कोई न कोई पद अवश्य देती है। हमें भी इस बार उम्मीद है कि कामकाजी महिलाओं को चुनाव समर में उतरने का मौका मिलेगा। भाजपा से जुड़ी महिलाओं का रिजल्ट भी शानदार है।

दिग्गज महिलाएं हारीं भी
भाजपा की मंत्री रही रेणुका सिंह पराजीत हो चुकी है। इसी तरह महिला एवं बालविकास मंत्री लता उसेंडी भी पराजय का सामना करना पड़ा था। अरविंद नेताम की पुत्री प्रीति नेताम भी चुनाव हार चुकी है। वाणी राव भी अमर अग्रवाव के सामने टिक नहीं पाई। राज्यसभा सांसद छाया वर्मा भी हार चुकी है।

कांग्रेस भाजपा से आगे
महिलाओं को टिकट देने के मामले में कांग्रेस भाजपा से आगे हैं, लेकिन जीत दर्ज करने के मामले में भाजपा आगे हैं। वर्ष 2003 के चुनाव में कांग्रेस ने 8 महिलाओं को टिकट दिया था, जिसमें से एक भी महिला चुनाव जीत नहीं पाई। इस चुनाव में भाजपा की रेणुका सिंह ने प्रेमनगर सीट से, पिंकी धुर्वे ने सिहावा से, रमशीला साहू ने गुंडरदेही और बसपा की कामदा जोल्हे ने सारंगढ़ से जीत दर्ज की थी। कांग्रेस के राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के निधन से कोटा सीट के रिक्त होने के बाद वर्ष 2006 में रेणु जोगी ने वहां से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी।

वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 10 महिलाओं को टिकट दी थी, जिसमें से कोटा से रेणु जोगी, सक्ती से सरोजा मनहरण, सिहावा से अंबिका मरकाम, सारंगढ़ से पदमा घनश्याम मनहर और दुर्ग ग्रामीण से प्रतिमा चंद्राकर ने जीत का परचम फहराया था। इस चुनाव में भाजपा की रेणुका सिंह, बलौदाबाजार की लक्ष्मी बघेल, डौंडीलोहारा की नीलिमा सिंह टेकाम, कांकेर की सुमित्रा मारकोले, कोंडागांव से लता उसेंडी और वैशाली नगर से सरोज पाण्डेय ने जीत दर्ज की थी।