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चिप्स ने मेडिकल की काउंसिलिंग करने से किए हाथ खड़े, सॉफ्टवेयर ही तैयार नहीं

- एमओयू के बाद भी चिप्स पीछे हटा, इस साल भी काउंसिलिंग डीएमई स्तर पर होगी

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रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने पहली बार चिकित्सा शिक्षा संचालनालय अंतर्गत आने वाले सभी शिक्षण संस्थानों के लिए काउंसिलिंग की पूरी प्रक्रिया छत्तीसगढ़ इंफोटेक प्रमोशन सोसाइटी (चिप्स) से करवाने का निर्णय लिया था। बकायदा इसके लिए एमओयू भी हुआ था। मगर, ऐन वक्त पर चिप्स ने हाथ खड़े कर दिए हैं। संचालनालय को लिखकर दे दिया है कि वह अभी मेडिकल की काउंसिलिंग की प्रक्रिया करवाने के लिए तैयार नहीं है। सॉफ्टवेयर तैयार करने में जनवरी-फरवरी तक का समय लग सकता है। ऐसी स्थिति में आनन-फानन में संचालक डॉ. विष्णु दत्त ने अपनी काउंसिलिंग कमेटी को काउंसिलिंग प्रक्रिया को विधिवत करने के निर्देश दिए हैं।

पत्रिका से बातचीत में डॉ. दत्त ने कहा कि संचालनालय ही अब तक काउंसिलिंग करवाता आ रहा था। एमडीएस की काउंसिलिंग से चिप्स को शुरुआत करनी थी, मगर उन्होंने नहीं की। हमें उम्मीद थी कि एमबीबीएस, बीडीएस और एमडी-एमएस की काउंसिलिंग से वे शुरुआत करेंगे। मगर, उन्होंने इससे भी फिलहाल असहमति जताई है। हालांकि नर्सिंग की काउंसिलिंग करवाने के लिए चिप्स ने संचालनालय से डेटा मांगा है, जो दिया जा चुका है। इस मामले में भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष अमित साहू का कहना है कि चिप्स द्वारा काउंसिलिंग की तैयार नहीं कर पाना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

पारदर्शिता रहे, इसलिए लिया गया था निर्णय
चिप्स से काउंसिलिंग करवाने के पीछे वजह पारदर्शिता बताई गई थी। क्योंकि बीते कुछ वर्षों में कई बार मेरिट सूची कई तकनीकी कारणों से रद्द करनी पड़ी थी। मामले कोर्ट तक पहुंचे थे। चिप्स तकनीकी रूप से सक्षम है, इसलिए उसे जिम्मेदारी दी गई थी।