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छत्तीसगढ़ में महापौर के लिए चुनाव लड़ना अब हुआ 4 गुना और महंगा, जानिए क्या है वजह

महापौर के लिए भाग्य आजमाने के लिए चार गुना तथा पार्षद के लिए नामांकन-पत्र अब पांच गुना तक अधिक राशि देनी होगी।

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pramod dubey

रायपुर . छत्तीसगढ़ में महापौर, अध्यक्ष और पार्षदों का चुनाव लड़ना अब महंगा हो गया है। महापौर के लिए भाग्य आजमाने के लिए चार गुना तथा पार्षद के लिए नामांकन-पत्र अब पांच गुना तक अधिक राशि देनी होगी। छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग ने नामांकन-पत्र की कीमतों में भारी इजाफा किया है।

राज्य निर्वाचन आयोग ने निकाय चुनाव को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए छत्तीसगढ़ नगरपालिका निर्वाचन नियम 1994 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। इसका राजपत्र में प्रकाशन भी कर दिया गया है। इसमें नामांकन से लेकर चुनाव चिह्न आवंटन तक में संशोधन किया गया है। इसमें सबसे बड़ा बदलाव नामांकन-पत्र की कीमतों में किया गया है।

महापौर पद के उम्मीदवारों से 20 हजार रुपए लिए जाएंगे। पिछले निकाय चुनाव में महापौर प्रत्याशियों से 5 हजार रुपए लिए गए थे। इसी तरह नगर पालिका अध्यक्ष के लिए 15 हजार रुपए लिए जाएंगे। जबकि इसके पहले तक 3 हजार रुपए ही लिए जाते थे। नगर पंचायत के अध्यक्ष पद के लिए 2 हजार की जगह अब 10 हजार रुपए लिए जाएंगे।

इसी तरह पार्षदों के नामांकन फार्म की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है। नगर निगम के पार्षद के लिए 1 हजार की जगह 5 हजार, नगर पालिका पार्षद के लिए 500 की जगह 3 हजार रुपए और नगर पंचायत के पार्षद के लिए 250 रुपए की जगह 1 हजार रुपए देने होंगे।

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1994 से नहीं बढ़ी थी नामांकन राशि

अफसरों के मुताबिक वर्ष 1994 के बाद से इस राशि में कोई बदलाव नहीं किया गया था। जबकि, मध्यप्रदेश ने छत्तीसगढ़ से अलग होते ही राशि में बदलाव कर दिया था। इस मामले में छत्तीसगढ़ पीछे रह गया था। विधानसभा और लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन-पत्र राशि में वृद्धि के बाद स्थानीय निकाय चुनाव में राशि की बढ़ोतरी की गई है।

नगर निगम महापौर 5000 20000

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय इसी साल छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव में शत-प्रतिशत मतदान केंद्रों में वीपीपैट (वोटर वेपीफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल) का उपयोग करने की तैयारी कर रहा है। यह एक ऐसी मशीन है, जिसे इवीएम के साथ जोड़ा जाता है। वीवीपैट में एक विजुअल डिस्प्ले यूनिट और एक प्रिंटर होता है। यह बैटरी से संचालित होती है। इसे बैलट यूनिट के साथ मतदान प्रकोष्ठ में रखा जाएगा। इसका फायदा यह है कि जब कोई भी मतदाता इवीएम का इस्तेमाल करके अपना वोट देता है तो इस मशीन में वह उस प्रत्याशी का नाम भी 7 सेकंड तक देख सकता है, जिसे उसने वोट दिया है। इस मशीन का उपयोग प्रदेश में 2014 के लोकसभा चुनाव में रायपुर विधानसभा क्षेत्र में प्रथम बार किया गया था। आयोग के निर्देशानुसार अब प्रत्येक विधानसभा के एक मतदान केंद्र के वीपीपैट में प्राप्त मतों की गणना भी की जाएगी।