
फलों पर लगे स्टीकर में होता है खतरनाक कैमिकल, इसलिए सरकार ने लगाया बैन
रायपुर. अच्छी क्वालिटी के फल होने के भरोसे में लोग स्टीकर लगे फल खरीद लेते हैं। लेकिन इन स्टीकर को फलों पर चिपकाने में जो गोंद इस्तेमाल होता है, उसमें खतरनाक कैमिकल होता है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है।
सरकार ने छत्तीसगढ़ में स्टीकर लगे फलों की बिक्री पर बैन लगा दिया है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने 17 अक्टूबर को इसके आदेश जारी कर दिए हैं।
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[typography_font:18pt;" >पढ़ें- बेस्ट क्वालिटी या ओके टेस्टेड
बाजार में बिकने वाले सेब, आम, संतरा, अमरूद, केला, सीताफल, नाशपाती आदि फलों परं स्टीकर चिपके होते हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के मुताबिक व्यापारी फल पर स्टीकर का इस्तेमाल प्रीमियम दिखाने या कई बार फलों के खराब हिस्सों की खामियां छुपाने के लिए करते हैं। फलों पर जो स्टीकर चिपके होते हैं उन पर व्यापारी की ब्राण्ड के नाम, ओके टेस्टेड, बेस्ट क्वालिटी या फल का नाम लिखा होता है।
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[typography_font:18pt;" >पढ़ें- स्टीकर बताते हैं फलों की गुणवत्ता
फलों पर लगे इस तरह के स्टीकर फलों की गुणवत्ता बताने के लिए होते हैं। इनसे पता लगता है कि कौन सा फल सेहत के लिए अच्छा है और कौन से फल से सेहत को नुकसान हो सकता है। स्टीकर पर फल के दाम, एक्सपायरी डेट और पीएलयू (प्राइज लुक अप) कोड होता है। पीएलयू कोड विशेष अंक से शुरू हुई संख्या होती है जिससे पता लगाया जा सकता है कि वह फल कैसे उगाया गया है और उसमें किसी तरह के रसायन का इस्तेमाल हुआ है या नहीं।
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[typography_font:18pt;" >पढ़ें- ऑर्गेनिक फ्रुट
किसी स्टीकर पर दिया पीएलयू कोड संख्या 9 से शुरू होता है और पांच अंकों का होता है तो इससे पता लगता है कि फल को उगाने के लिए जैविक तरीकों को अपनाया गया है। वहीं अगर किसी फल पर लगा स्टीकर संख्या 8 से शुरू होता है और पांच अंकों का है तो इससे पता लगता है कि फल गैर-आर्गेनिक तरीके से उगाया गया है।
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[typography_font:18pt;" >पढ़ें- मोम और रंगों के उपयोग पर भी रोक
सरकार ने फल व सब्जियों में मोम, खनिज तेल, रंगों के उपयोग पर भी रोक लगाई है। साथ ही कहा है कि फलों को एसीटिलिन गैस का प्रयोग करके कृत्रिम रूप से पका कर विक्रय नहीं किया जाएगा। इसके अलावा सड़े-गले फलों और सब्जियों की ब्रिकी पर भी रोक लगी है।
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[typography_font:18pt;" >पढ़ें- 10 लाख रुपए तक जुर्माना भी
अब कोई भी खाद्य कारोबारी असुरक्षित खाद्य का संग्रह, वितरण और विक्रय करते पाया जाएगा तो उनके विरुद्ध खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत 7 वर्ष की सजा और 10 लाख रुपए तक के जुर्माना का प्रावधान है।
Published on:
18 Oct 2019 07:00 am
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