
कार मैकेनिक की बेटी ताइक्कांडो में बनी चैम्पियन
चंदू निर्मलकर@रायपुर. कहते हैं ख्वाब वहीं देखते हैं जिनके हौसलों में उड़ान भरने का जज्बा होता है। इसी सोच से जी-तोड़ मेहनत कर रही कार मैकेनिक की जाबाज बेटी ने दिल्ली में जीत का पंच लगाकर ताइक्कांडो में चैम्पियन बन गई। इस बेटी ने सफलता की पहली सीढ़ी को तो पार कर ली है। अब वे इससे आगे बढ़कर देश के लिए गोल्ड मेडल लाने का सपना संजो रही है। हम बात कर रहे हैं, गुढि़यारी की रहने वाली ताइक्कांडो खिलाड़ी निधि गनवीर की। पिता अपनी लाडली बेटी का हुनर देख उनका सीना गर्व से चौड़ा होगा है।
घर की आर्थिक परिस्थितियों और बेहद गरीबी से जूझकर ताइक्कांडो में जीत का पंच लागाकर खिलाड़ी निधि गनवीर अपनी किस्मत बुलंद कर रही है। निधि लगातार ६ सालों से न सिर्फ ताइक्कांडोऔर जीतक्कांडोकी ट्रेनिंग ले रही है। इस दौरान निधि ने कई तरह की तकलीफों का सामना करना पड़ा। बताती है परिस्थितियों से लड़कर दिल में देश के लिए कुछ कर गुजरने का सपना लिए हर दिन हाड़-तोड़ पै्रक्टिस की। पिता और बड़ी दीदी ने दर्द पर मरहम लगाकर जीतने का हौसला दिए। आज अपने हुनर के दम पर निधि स्टेट लेवल प्रतियोगिता में फस्र्ट, सेकंड और थर्ड मेडल अपने नाम कर चुकी है। नेशनल लेवल पर दिल्ली में ब्राउंस मेडल जीत ताइक्कांडो में चैम्पियन बन गई। अब सरकारी स्कूल में अपनी जैसी लड़कियों को ट्रेनिंग देने का नेक काम कर रही है। निधि कहती है कि वे बड़ी होकर पुलिस विभाग में बड़ा अफसर बनना चाहती है।
अपनी जैसी लड़कियों को दे रही ट्रेनिंग
निधि जब 8वीं क्लास में थी तब उसकी बड़ी बहन मोनिका गनवीर ने स्कूल में ताइक्कांडो की ट्रेनिंग लेकर आगे बढऩे की प्रेरणा दी। इसके बाद पढ़ाई के साथ-साथ ताइक्कांडो में पसीना बहाना शुरू कर दिया। निधि बताती है कि वह गुढि़यारी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यिम विद्यालय तिलक नगर में स्कूल में अपनी जैसी गरीब छात्राओं को ट्रेनिंग दे रही है।
माता-पिता ने बढ़ाया मनोबल
ताइकांडो खिलाड़ी निधि गनवीर अपने घर की लाडली और छोटी बेटी है। पिता सुशील गनवीर कार मैकेनिक का काम करते हैं जबकि मां भूमिका गनवीर हाउस वाइफ है। दोनों ने अपनी बेटी का सपना पूरा करने पूरा सहयोग किया। निधि बताती है कि उनकी बड़ी बहन मोनिका गनवीर कठिनाईयों में एक दोस्त की तरह मदद कर दिल में जीत हासिल करने का हौसाला बढ़ाया। बड़ा भाई सुमित गनवीर भी मजदूरी कर छोटी बहन की सभी जरूरतों का पूरा ख्याल रखता है।
हिम्मत नहीं हारे, लड़कर आगे बढ़े
आमतौर पर लड़कियों को कमजोर की नजर से देखा जाता है। इस वजह से पढ़ाई पूरी कर लेने के बाद उसे बाहर काम करने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा कई को तो घर की आर्थिक स्थितियों को भी संभालाना होता है। निधि एेसी लड़कियां के लिए आज प्रेरणा बन गई है। निधि कहती है कि निराश होने के बजाए परिस्थितियों से लड़े यकीनन सफलता आपकी कदम चुमेगी।
यहां तैयार हो रही निधि जैसी कई लड़कियां
शहर में बढ़ती छेड़छाड़ की घटनाओं के कारण अक्सर लड़कियां को डर के साए में रहना पड़ता है। उनकी इसी डर को खत्म करने के लिए स्कूल की छात्राओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दी जा रही है। मनचले ज्यादातर स्कूली छात्राओं को बुरी निगाह से देखकर अक्सर छींटाकशी करते हैं। इन बदमाशों को अब छात्राएं एक पंच से चारों खाने चित कर देंगी। यहां निधि जैसी छात्राएं न सिर्फ आत्मरक्षा के गुर सीख रही है, बल्कि देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने का भी ख्वाब देख रही है।
प्राचार्य सरिता पांडेय, शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल तिलक नगर गुढि़यारी
Updated on:
08 Oct 2017 08:10 pm
Published on:
08 Oct 2017 08:02 pm
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